42. कार्यकारी परिषद में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के लिए प्रस्ताव - Page 135

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चाहिए। इसके बजाय, पन्द्रह सदस्यीय परिषद् में उन्हें केवल एक सीट दी गई है। यह असहनीय स्थिति है।

इस मामले पर मैंने 5 जून को आयोजित कार्यकारी परिषद की बैठक में आपका ध्यानाकर्षित किया था, जब आपने परिषद के समक्ष हिज मेजेस्टी की सरकार के प्रस्तावों का उल्लेख किया था। 6 तारीख की सुबह बैठक में आपने प्रस्तावों के संबंध में पूर्व संध्या पर परिषद के सदस्यों द्वारा की गई आलोचनाओं का क्रमवाद उŸार दिया था। मैं सहज ही उम्मीद करता था कि मैंने जो मुद्दा उठाया था आप उस पर भी कार्यवाही करेंगे। किंतु मुझे आश्चर्य है कि आपने इसे पूरी तरह नजर अंदाज किया और इसका कोई उल्लेख भी नहीं किया। ऐसा नहीं कि मैं इस बारे में सुस्पष्ट नहीं था बल्कि मैं अधिक सुस्पष्ट था। आपके द्वारा उल्लेख न करने की भूल पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि या तो इस मुद्दे को पर्याप्त महत्व का नहीं माना गया कि इसे आपके ध्यान में लाया जाए या आपने सोचा कि मेरा उद्देश्य एक विरोध दर्ज करने से अधिक और कुछ नहीं था। मैं इस छाप को मिटाना चाहता हूं और बिल्कुल निभान्त रूप से यह बताना चाहता हूं कि यदि हिज मेजेस्टी की सरकार इस गलती को सधारने में असफल रहती है, तो मैं निश्चित रुप से इस पर कार्रवाई करुंगा। अतः मैं यह पत्र लिखना आवश्यक समझता हूं।

यदि ऐसा कोई प्रस्ताव कांग्रेस या हिंदू महासभा की ओर से आया होता तो मैं इतना आहत महसूस नहीं करता। किंतु यह निश्चय हिज मेजेस्टी की सरकार का है। यहां तक कि आम हिन्दुओं की राय भी विधान सभा और कार्यकारी परिषद में अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाए जाने के पक्ष में है। यदि आम हिंदू राय को सप्रू समिति के प्रस्तावों के सूचक के रूप में लिया जाए तो हिज मेजेस्टी की सरकार के प्रस्ताव को अवनति समझा जाना चाहिए। इस संबंध में सप्रू समिति ने कहा हैः-

‘‘भारत शासन अधिनियम में सिक्खों और अनुसूचित जातियों को दिया गया प्रतिनिधित्व सुस्पष्ट रूप से अपर्याप्त और अन्यायपूर्ण है तथा इसे पर्याप्त मात्रा में बढ़ाया जाना चाहिए। उनका प्रतिनिधित्व कितना बढ़ना चाहिए, यह बात संविधान तैयार करने वाले निकाय पर छोड़ देनी चाहिए।’’

‘‘धारा (ख) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संघ की कार्यपालिका इस रूप में एक समेकित केबिनेट होगी, कि इसमें निम्नलिखित समुदायों का प्रतिनिधित्व हो, अर्थात्

( i ) अनुसूचित जातियों के अलावा, हिंदू