120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय भाग-1
सामान्य
- अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की कार्य-समिति की बैठक 2 अप्रैल,
1946 को दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें केबिनेट मिशन के उद्देश्य, अर्थात्
भारत को एक स्व-शासित देश बनाने की लक्ष्य प्राप्ति में सहायता देने के
प्रश्न पर सर्वोŸाम रूप से विचार करते हुएः
यह संकल्प किया गया कि इस समस्या के बारे में मिशन के समक्ष अपना सुविचारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाए कि कैसे उक्त प्रस्ताव के सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जाएं, जिससे न केवल हिंदू बहुसंख्यक वर्ग को ही स्वतंत्रता प्राप्त हो बल्कि अल्पसंख्यक वर्गों और विशेष रुप से अनुसूचित जातियों को बहुसंख्यक समुदायों के अन्याय से भी मुक्ति मिले, जिसमें राजनीतिक परिणाम के न होने से परिवर्तन किए जाने की बाध्यता न हो और जो सांप्रदायिक होने के कारण बहुसंख्यकों के लिए नियम हो।
- कार्य-समिति अनुसूचित जातियों के प्रति भेदभाव किए जाने को स्वीकार करने
से बच नहीं सकती कि वे भारत की राजनीतिक प्रगति पर रोक लगा रही हैं।
कार्य-समिति की राय में इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत की राजनीतिक
प्रगति को बनाए रखने की जिम्मेदारी पूरी तरह से बहुसंख्यक समुदायों पर है
जिन्होंने रोषपूर्वक और अनौचित्यपूर्वक यह जानने का अधिकार जताया है कि
अल्पसंख्यक समुदायों और विशेषकर अनुसूचित जातियों को क्या-क्या सुरक्षा
मिलनी चाहिए और वास्तव में, उसने अल्पसंख्यक समुदायों और अनुसूचित
जातियों के लिए सुरक्षा के सवाल पर अपना ब्लू-प्रिंट जारी करना टाला है।
अनुसूचित जातियों ने अब तक जिस बात पर जोर दिया है और भविष्य में
भी ऐसा करने से हिचकना नहीं है, वह है-सर्वप्रथम उन्हें अपने अधिकारों
और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संविधान में ही समुचित रक्षोपायों को शामिल
कराना और दूसरे अपने अपने अधिकारों की प्रकृति और जो सुरक्षा वे चाहते
हैं उसके लक्षणों के बारे में बहुसंख्यकों की स्वीकृति प्राप्त करना।
- कार्य-समिति मिशन को यह बताना अनावश्यक समझती है कि अनुसूचित
जातियों द्वारा उठाया गया यह कदम एक बाध्यता के रुप में हिज मेजेस्टी की
सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, जैसा समय-समय पर हिज मेजेस्टी
की सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा दी गई प्रतिज्ञाओं में देखा जा सकता है और