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जिन्हें इस संकल्प के परिशिष्ट 1 में उद्धृत किया गया है। कार्य-समिति को विश्वास है कि मिशन वार्ताओं के फलस्वरुप किन्हीं अंतिम निष्कर्षों पर पहुंचते समय, अनुसूचित जातियों को दी गई प्रतिज्ञाओं से विचलित नहीं होगा और किसी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेते हुए, किसी अन्य दल को अनुसूचित जातियों को यह बताने की अनुमति नही देगा कि उन्हें कौन से रक्षोपाय दिए जाएं।
- मिशन के उद्देश्यों से उत्पन्न होने वाले विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार तय करने से पूर्व, कार्य-समिति विभिन्न प्रांतों में हाल ही में हुए प्रारंभिक चुनावी परिणामों पर मिशन का ध्यान आकर्षित करना चाहती है, विशेषकर इसलिए कि इन चुनावों के निष्कर्षों से यह सिद्ध हुआ है कि केवल अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ ही एक ऐसा संगठन है, जो भारत की अनुसूचित जातियों की ओर से बोलने का दावा कर सकता है, और न तो कांग्रेस और न ही कोई अन्य छोटे-छोटे संगठन उनकी ओर से बात करने का अधिकार रखते हैं।
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भाग- II
- स्वतंत्र भारत के अंतिम रूप से तैयार संविधान के संबंध में, फेडरेशन की कार्य-समिति मिशन को यह बताना चाहती है कि अनुसूचित जातियां ऐसा कोई संविधान कभी स्वीकार नहीं करेंगी जिसमें निम्नलिखित रक्षोपाय प्रदान न किए जाएंः
( i ) सभी विधान मंडलों- केन्द्रीय और प्रान्तीय, में सही और पर्याप्त
प्रतिनिधित्वय
( ii ) सभी कार्य-पालिकाओं-केन्द्रीय और प्रान्तीय, में सही और पर्याप्त
प्रतिनिधित्व;
( iii ) अलग निर्वाचन-क्षेत्रों के माध्यम से निर्वाचनों का उपबंध; ( iv ) लोक सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व;
( v ) लोक सेवा आयोग-संघीय और प्रान्तीय, में पर्याप्त प्रतिनिधित्व; ( vi ) प्रान्तीय और केन्द्रीय सरकार के वार्षिक बजटों में अनुसूचित जातियों
की उच्चतर शिक्षा के लिए पर्याप्त राशि का उपबंध; और ( viii ) नई और अलग बस्तियों का उपबंध।