124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अत्याचार और उत्पीड़न वाली गतिविधियों के लिए और समर्थन जुटा रहे हैं। जब तक विधान मंडल कार्य पालिका और लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व का उपबंध नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे एक अनुसूचित जाति विरोधी नीति वाले उदासीन विधान मंडल और हिंदू समर्थक कार्य पालिका से घिरे रहेंगे।
- जहां तक अलग बस्तियां बसाने का प्रश्न है, कार्य-समिति की यह सुविचारित
राय है किः-
(क) वर्तमान ग्राम प्रणाली ने गांवों में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोगों को हिंदू जाति का दास बना दिया है। और इस तथ्य के होते हुए भी कि दण्ड संहिता दास प्रथा को मान्यता नहीं देती पूरे भारत के प्रत्येक गांव में अनुसूचित जातियां ग्राम प्रणाली के फलस्वरुप, वास्तव में सवर्ण हिन्दुओं के दास हैं। वास्तव में, अछूतों को दास बनाए जाने का कोई और प्रभावी तरीका तक ईजाद नहीं किया जा सकता था।
(ख) वर्तमान ग्राम प्रणाली, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि कौन अछूत है और कौन नहीं, अस्पृश्यता को स्थायी बनाने कोई और प्रभावी तरीका अभी तक मिल नहीं सका है।
(ग) ग्राम प्रणाली के अंतर्गत.............
( i ) अनुसूचित जातियों को गांव के भीतर रहने की अनुमति नहीं होती। उन्हें बाहरी क्षेत्र में रहना होता है। उन्हें गांव के कुंए से पानी भरने की अनुमति नहीं होती। उन्हें अपने बच्चों को गांव के स्कूल में भेजने की अनुमति नहीं होती है। गांव का कोई भी नाई उनके बाल नहीं काटता। वे समाज से कटे होते हैं, उनका गांव के सवर्ण हिन्दुओं से किसी प्रकार का संपर्क नहीं होता।
( ii ) उनके जीवन-यापन के लिए कोई स्वतंत्र माध्यम नहीं होता वे किसी भूमि के स्वामी नहीं होते। उन्हें आजादी से जीवन जीने के लिए आय का कोई साधन नहीं मिलता। उनके लिए केवल हिंदू उनसे कुछ खरीदारी नहीं कर सकता। उनमें से अधिकांशतः गांव में अपने हिंदू संरक्षकों से भोजन मांगकर गुजारा करते हैं। वे भूमिहीन मजदूरों का एक बड़ा वर्ग हैं, पूरी तरह से दबे-कुचले, वंशानुगत भिक्षुक बने रहने और अपने जीवन-यापन के लिए हिंदू भूस्वामियों द्वारा उनकी इच्छानुसार काम और इच्छानुसार मजदूरी पाने के लिए प्रतीक्षारत रहने वाला वर्ग है।
( iii ) उन्हें हिंदू भूस्वामियों द्वारा अपने मकानों से निकाले जाने के डर से दिन-रात जबरन मजदूरी करनी पड़ती है, जो उन्हें सस्ते श्रम का माध्यम मानते हैं, इस कारण