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वे सभी अनुसूचित जातियों के विरुद्ध एकजुट होने को सदा तैयार रहते हैं।
( iv ) उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी दबा-कुचला, अपमानित और नीचता भरा जीवन जीना पड़ा है। यह एक अनन्त नरक वाली स्थिति है। वे साफ कपड़े नहीं पहन सकते, वे आभूषण नहीं पहन सकते, वे अच्छा भोजन नहीं कर सकते, वे किसी हिंदू की उपस्थिति में कुर्सी पर नहीं बैठ सकते और उन्हें हर गन्दा काम करना पड़ता है।
( v ) ग्रामीण हिन्दुओं का अनुसूचित जातियों पर इतना अधिक दबदबा है और वह इतना गहरा बैठ चुका है, जैसा पिछले चुनाव से स्पष्ट है, कि अनुसूचित जाति के मतदाता, यदि हिंदू ग्रामीण पसंद न करें तो, अपनी पंसद के उम्मीदवार को अपना वोट तक नहीं दे सकते।
( vi ) ग्रामीण प्रणाली ने अनुसूचित जातियों के लिए किसी भी प्रगति के विचार को इस हद तक असंभव बना दिया है कि हिंदू वर्ग सामाजिक बहिष्कार को सबसे विश्वसनीय हथियार के रुप में उपयोग करता है, जिसके सहारे वह सदैव अनुसूचित जातियों को धमकाता है, और उन्हें नीचा दिखाने तथा अनुसूचित जातियों के लाभ के लिए किसी भी ऐसी गतिविधि अथवा कार्य को रोकता है जिससे हिन्दुओं के हितों और हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचे।
- जब तक यह ग्रामीण संगठन नहीं टूटेगा इसमें कोई संदेह नहीं है कि अनुसूचित जातियां अछूत बनी रहेंगी, सवर्णों के अत्याचार और उत्पीड़न जारी रहेंगे, वे एक स्वतंत्र, पूर्ण और सम्मानजनक जीवन नहीं जी सकेंगे। कार्य-समिति लंबे और बहुत विचार-विमर्श के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि सवर्ण हिन्दुओं, जो स्वराज के अंतर्गत काफी महŸा पा सकते हैं और जो हिंदू राज का दूसरा नाम है, अत्याचार और उत्पीड़न से अनुसूचित जातियों के बेहतर संरक्षण के लिए और अनुसूचित जातियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ताकि वे अपने मानवीय मूल्यों का विकास कर सकें, साथ ही अस्पृश्यता को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ग्राम प्रणाली में मूलभूत परिवर्तन लाना आवश्यक है, ताकि अनुसूचित जातियां उस वैमनस्य से मुक्त हो सकें जो वे हिन्दुओं के द्वारा अनेक शताब्दियों से सहन करते आ रही हैं। ग्राम प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता को महसूस करते हुए, कार्य-समिति यह अभिनिर्धारित करती है कि भारत के संविधान में निम्नलिखित बातों के साथ उपबंध करना अनिवार्य हैः-
( i ) संविधान में अनुसूचित जातियों को उनके वर्तमान निवास-स्थानों से स्थानांतरित करके नए अनुसूचित जाति गांवों में, जो हिंदू गांवों से दूर और स्वतंत्र हों, भेजने का उपबंध किया जाना चाहिए।