128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उनकी आधी सीटें दी जाती हों।
( iii ) कि भारत सरकार के 1943 के संकल्प में गर्वनर जनरल की सहमति
के बिना लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व को लेकर
ऐसा कोई परिवर्तन न किया जाए, जो अनुसूचित जाति को बुरी तरह
प्रभावित करे।
( iv ) कि अनुसूचित जातियों की उच्चतर शिक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा
किया गया विŸाय उपबंध गर्वनर जनरल की सहमति के बिना रद्द अथवा
अनुसूचित जाति को हानि पहुंचाने के लिए आशोधित न किया जाए।
( v ) कि स्वतंत्र भारत के लिए अंतिम रुप से संविधान में अनुसूचित जातियों
को रक्षोपाय प्रदान करने वाले सिद्धांत पार्टियों द्वारा अग्रिम रूप से
स्वीकार किए जायें, जैसा कि लार्ड वावेल ने गांधी जी को लिखे अपने
15 अगस्त, 1944 के पत्र में उल्लेख किया था। भाग- VI
पाकिस्तान पर राय
- कार्य-समिति को पाकिस्तान की मांग के बारे में जानकारी है। इस मांग से उत्पन्न मुद्दों से अनुसूचित जातियां बहुत चिंतित हैं। तथापि, कार्य-समिति महसूस करती है कि इस स्तर पर अनुसूचित जातियों की राय को जाहिर करना उपयुक्त नहीं होगा, और वह अपने विचार तब तक आरक्षित रखना चाहती है जब तक यह मालूम न हो जाए कि अब इससे छुटकारा संभव नहीं है।
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परिशिष्ट 1
- ‘‘लेखक कहते हैं कि दलित वर्गों को भी आत्म-रक्षा का सबक सीखना चाहिए। यह उम्मीद करना वास्तव में काल्पनिक होगा कि एक असेम्बली में जहां साठ या सŸार सदस्य सवर्ण हिंदू हैं, वहां दलित समुदाय के एक सदस्य को शामिल करके ऐसा परिणाम प्राप्त किया जाए। रिपोर्ट के पैरा 51, 152, 154 और 155 के सिद्धांतों के बेहतर उपयोग के लिए हमें अनुसूचित जातियों से खुले मन से व्यवहार करना चाहिए। हमारा विचार है कि प्रत्येक परिषद में दलित वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि उन्हें पूरी तरह समाहित होने से बचाया जा सके, और साथ