135
डॉ. अम्बेडकर ने दावा किया कि भारत छोड़ने से पहले अंग्रेजों को सुनिश्चित करना चाहिए कि नए संविधान में अनुसूचित जातियों को जीवन के मौलिक मानवाधिकार, स्वतंत्रता और खुशी के अवसर, तथा उनके लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों की बहाली और उनकी मांग के अनुसार उन्हें अन्य रक्षोपाय प्रदान किए जाएं। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का सुझाव था कि भारतीय राजनीति पर दो मुद्दे हावी रहे हैं, एक तो ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता प्राप्त करना और दूसरा हिन्दू-मुस्लिम समस्या। एक बार इन समस्याओं का हल हो जाने पर, दल संभवतः आर्थिक मामलों पर बंट जाएगा। निश्चित रूप से अनुसूचित जातियों को अपने अधिकार सुरक्षित कराने का एक बेहतर मौका मिलेगा कि वे अंग्रेजों पर विश्वास करने की बजाय, जो सŸा हस्तांतरण करने वाले हैं, वाम पंथ के साथ रहें। डॉ. अम्बेडकर ने दोहराया कि जब तक संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र रहेंगे, अनुसूचित जातियों के मतदाताओं की संख्या इतनी कम रहेगी कि हिंदू उम्मीदवार आराम से उनकी इच्छाओं को अनदेखा कर सकेंगे। सवर्ण हिंदू अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों का कभी समर्थन नहीं करेंगे। अलग निर्वाचन क्षेत्र मौलिक अधिकार था, जिनके बिना अनुसूचित जातियों को कभी भी अपने स्वयं के प्रतिनिधि नहीं मिलेंगे।
1 भारत में सŸा का हस्तातंरण, पृ. 243-44 कोटेड, खैरमॉडे जिल्द 8, पृ. 62-64, जगजीवन राम, राधानाथ दास और पृथ्वी सिंह आजाद के साक्षात्कारों के लिए परिशिष्ट सं. IV देखें।