136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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डॉ. भीमराव अम्बडेकर और फील्ड मार्शल विस्काउंट वॉवेल
के बीच बैठक पर टिप्पणी
डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति संघ की नीति पर केबिनेट
मिशन को 5 अप्रैल, 1946 को एक ज्ञापन सौंपा और उसी दिन दोपहर 12 बजे
डॉ. भीम राव अम्बेडकर और फील्ड मार्शल विस्काउंट वॉवेल सहित केबिनेट मिशन
के बीच एक बैठक हुई। बैठक के बाद एक टिप्पणी तैयार की गई, जो इस प्रकार
है.....संपादक मंडल
अप्रकाशित
डॉ. अम्बेडकर ने अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ और कार्य-समिति की 2
अप्रैल को आयोजित बैठक में इस पारित संकल्प की प्रति देते हुए कहा कि प्रतिनिधि
मंडल को दी गई ज्ञापन की प्रतियों में उन्हें थोड़ा कुछ जोड़ना था।
इस ज्ञापन के पैरा 5 में निहित सूची में सरकारी और सार्वजनिक सेवाओं में
अनुसूचित जाति के पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने के लिए वृद्ध स्तर पर तैयार किए
गए रक्षोपायों का उल्लेख है। संघ ऐसा कोई संविधान कभी भी स्वीकार नहीं करेगा।
जिनमें इन्हें शामिल नहीं किया गया हो।
पाकिस्तान के प्रश्न पर, डॉ. अम्बेडकर ने शंका जताई कि क्या मुस्लिम समुदाय
को नए देश से कुल मिलाकर वास्तव में लाभ होगा। उनमें से अनेक हिन्दुस्तान में
रहना चाहेंगे और अनेक देश छोड़ने को अनिच्छुक अथवा असक्षम होंगे।
उन्होंने आश्चर्य जताया कि मुस्लिमों के संदर्भ में पाकिस्तान का रुख स्थायी था
अथवा कामचलाऊ। काफी हद तक यह कामचलाऊ होगा। किंतु इस बारे में अधिक
देर तक विचार करना असंभव था और मुस्लिम मांग इतनी अधिक बढ़ गई थी कि
किसी रूप में उसे पूरा करना आवश्यक हो गया था। इस विषय पर अपनी पुस्तक
में उन्होंने प्रस्ताव रखा था कि इस दुविधा को उस हल को अपनाते हुए सुलझाया
जाना चाहिए, जो वर्ष 1920 में श्री अश्कीथ ने आयरिश समस्या के लिए खोजा था।