45. डॉ. भीमराव अम्बडेकर और फील्ड मार्शल विस्काउंट वॉवेल के बीच बैठक पर टिप्पणी - Page 158

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उम्मीदवारों द्वारा पराजित कर दिए गए थे, अंतिम चुनावों में वे जीते थे और, दूसरे सामान्य जाति के मतदाताओं की संख्या की तुलना मे अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या कितनी कम थी। तो भी, अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने लूटपाट और आगजनी जारी रखी; कांग्रेस ने क्या-क्या किया यह दिखाने के लिए उन्होंने अनेक फोटो प्रस्तुत किए।

केंद्रीय विधान मंडल का अस्तित्व 1919 से है, किन्तु अनुसूचित जाति की सहायता के उद्देश्य से कभी कोई प्रश्न नहीं पूछा गया, कभी कोई संकल्प नहीं रखा गया और न ही ऐसा अन्य कोई कार्य किया गया।

अनुसूचित जातियों की स्थिति विशेषकर भारत के राज्यों में खराब थी। यहां तक कि कुछ ऐसी खाद्य सामग्रियां थी, जिन्हें खाने की उन्हें अनुमति तक नहीं थी। प्रतिनिधित्व रखने वाले संस्थानों, जो अब कुछ राज्यों में स्थापित हो रहे थे, मुस्लिमों के अलावा किसी अन्य जाति को अलग प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था। राजनीतिक विभाग को इन संवैधानिक परीक्षणों में बहुत रुचि दिखानी चाहिए थी और यह देखना चाहिए था कि अनुसूचित जातियों को अलग निर्वाचन क्षेत्र दिए जाएं। प्रतिनिधि मंडल को अखिल भारतीय अनुसूचित जाति राज्य सम्मेलन के अध्यक्ष से मिलना चाहिए।

अनुसूचित जातियां ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की जन-शक्ति की प्रारंभ से ही स्रोत रहीं है, और उनकी सहायता से ही अंग्रेज भारत को फतह कर सके थे। तभी से अंग्रेजों के मित्र रहे हैं। फिर भी अंग्रेजों ने कभी भी अपने होशो-हवास में और जानबूझ कर उनकी मदद नहीं की, जबकि 1892 से उन्होंने मुस्लिमों की बहुत मदद की थी।

उनका विचार था कि यदि भारत स्वतंत्र हो जाता है तो यह एक बहुत बड़ी आपदा जैसा होगा। भारत छोड़ने से पूर्व अंग्रेजों को सुनिश्चित करना चाहिए कि नए संविधान में अनुसूचित जातियों को जीवन के मौलिक मानवाधिकार, स्वतंत्रता और खुशी और के अवसर, तथा उनके लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों की बहाली की गारंटी और उनकी मांग पर उन्हें अन्य रक्षोपाय प्रदान किए जाएं। इस समय उनका अनुसरण करने वाले मायाजाल से मुक्त होकर होकर आंतकवाद और सांप्रदायिकता की ओर रुख कर रहे थे। वह संविधानिक तरीकों की प्रभावोत्पादकता के लिए उनके साथ विचारण पर थे।

लॉर्ड पेथिक लॉरेन्स ने कहा कि भारतीय राजनीति पर दो मुद्दे हावी रहे हैं, एक तो अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करना और दूसरा हिंदू-मुस्लिम समस्या। एक बार इन समस्याओं का हल हो जाने पर, दल संभवतः आर्थिक मामलों पर बंट जाएगा। निश्चित रुप से अनुसूचित जातियों को अपने अधिकार सुरक्षित कराने का