140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
एक बेहतर मौका मिलेगा कि वे अंग्रेजों पर विश्वास करने की बजाय, जो शक्ति हस्तांतरण करने वाले थे, शांत होकर वाम पंथ के साथ जुड़े। इसके उŸार में डॉ. अम्बेडकर ने दोहराया कि जब तक संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र रहेंगे, अनुसूचित जातियों के मतदाताओं की संख्या इतनी कम रहेगी कि हिंदू उम्मीदवार आराम से उनकी इच्छाओं को अनदेखा कर सकेंगे। सवर्ण हिंदू, अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों का कभी समर्थन नहीं करेंगे। स्वीकृत रूप से, वर्तमान प्रणाली के अधीन अंतिम निर्वाचनों में उन्हें अछूतों के लिए मतदान करना होता था; किंतु ऐसा करने में उनका उद्देश्य कभी भी अपने उम्मीदवार का पक्ष लेनें का नहीं होता था बल्कि अपने संघ द्वारा
खड़े किए गए उम्मीदवार को मात्र हराना होता था। अलग निर्वाचन क्षेत्र मौलिक अधिकार था, जिनके बिना अनुसूचित जातियों को कभी भी अपने स्वयं के प्रतिनिधि नहीं मिलते।
सŸा का हस्तांतरण, जिल्द VII, सं. 58, पृ. 144-147