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अछूतों के लिए पृथक बस्तियां
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने केबिनेट मिशन को एक ज्ञापन सौपा जिसमें अछूतों के लिए अलग गांव बसाने की मांग की गई थी। प्रेस को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने इस विषय पर अपने विचार स्पष्ट किए-----संपादक मंडल
‘‘अनुसूचित जातियों के लिए अलग गांवों की मांग करना किसी दल के अधिकारों पर अतिक्रमण करना नहीं था, ये विचार एक साक्षात्कार में डॉ. भीम राव अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार द्वारा व्यक्त किए गए थे।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि देश में खेती योग्य भूमि का बहुत बड़ा भाग काश्तकारी के बिना बेकार पड़ा है, जिसका उपयोग अनुसूचित जातियों को बसाने के लिए किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार एक न्यास बना सकती है।
उनके विचार में, आपिŸा केवल उनकी ओर से आएगी, जो अनुसूचित जातियों को श्रम के स्रोत के रुप में उपयोग करने के आदी थे, क्योंकि ये श्रमिक समस्त गंदे काम करने के लिए उपलब्ध होते थे और जिन्हें सस्ती मजदूरी देकर काम करने पर मजबूर किया जा सकता था। वे इस दासता से मुक्त होना चाहेंगे क्योंकि बंबई और मद्रास जैसे प्रांतों में अनुसूचित जातियों को असहनीय परिस्थितियों में रहना पड़ता है, अतः उनके लिए अलग गांवों का होना आवश्यक था।
डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि गांवों के समाज की आर्थिक इकाई न होकर एक सामाजिक इकाई होने के कारण, इन अलग गांवों से किसी आर्थिक अवरोध जैसा डर नहीं था। इन क्षेत्रों के उत्पाद अन्य स्थानों पर जाने पर उन्हें सहर्ष स्वीकार किया जाएगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह मांग पाकिस्तान के क्षेत्रों पर भी लागू होगी, डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि यह लागू होगी। इस समय पाकिस्तान के बारे में कोई