47. केबिनेट मिशन के प्रस्तावों के विरुद्ध विरोध पत्र - Page 164

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अन्य विकसित समुदायों के समकक्ष लाने के लिए वे क्या प्रयास करते हैं, यह देखते हुए, मिशन को यह निर्णय लेना है कि केन्द्रीय कार्य पालिका में अनुसूचित जातियों को कितना प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। आपको याद होगा कि मैंने पिछले शिमला सम्मेलन के दौरान यह प्रश्न उठाया था और आप अनुसूचित जातियों को दो सीट देने के लिये तैयार थे जो मुस्लिमों के 50 प्रतिशत से थोड़ी कम थीं।

तीसरी मांग कोई नई नहीं है। इसमें आपकी उस राय को मात्र दोहराया गया है जो आपने अपने 15 अगस्त, 1944 के पत्र में गांधी जी को जाहिर की थी। उक्त पत्र के पैरा 5 में आपने कहा था-----

‘‘इन परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि आपने जो आधार सुझाया है उस पर विचार करने से किसी उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होगी। हालांकि, यदि हिंदू, मुस्लिम और अन्य महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक समुदायों के नेता सांक्रांतिक सरकार में सहयोग करने और वर्तमान संविधान के अंतर्गत कार्य करने के इच्छुक हों तो मेरा विश्वास है कि इस संबध में अच्छी प्रगति हो सकती है। ऐसी सांक्रतिक सरकार की सफलता के लिए, इसके गठन से पूर्व, सिद्धांतों के संबंध में हिन्दुओं और मुस्लिमों तथा सभी महत्वपूर्ण तत्वों के बीच समझौता होना चाहिए कि किस तरीके से नया संविधान बनाया जाना चाहिए।’’

आपने जिस सिद्दांत का उल्लेख किया है, वह हिज मेजेस्टी की सरकार द्वारा बनाया गया प्रतीत होता है और इसीलिए यह केबिनेट मिशन पर बाध्यकारी होना चाहिए। इस सिद्धांत को जो अनुसूचित जातियों द्वारा की गई मांगें हैं, लागू करने के लिए मिशन को दलों की सहमति लेना अनावश्यक प्रतीत होता है।

यदि अनुमति हो तो मैं बताना चाहूंगा कि यह निष्कर्ष निकालने के पर्याप्त आधार हैं कि मिशन यह नहीं सोचता कि अनुसूचित जातियों की मांगों पर निर्णय लेने से पहले हिन्दुओं की सहमति लेना आवश्यक है और इसीलिए अनुसूचित जातियों को शिमला सम्मेलन में अपने प्रतिनिधि भिजवाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है।

किन्तु दुर्भाग्यवश मस्तिष्क में आने वाला केवल यही अकेला स्पष्टीकरण नहीं है। इसका अन्य स्पष्टीकरण भी संभव है। इसमें केबिनेट मिशन अंतरिम संविधान के गठन के लिए कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते को मंजूरी देने के साथ-साथ अनुसूचित जातियों के मामले में विचार किए बिना इन्हें भविष्य के भारतीय संविधान का स्वरुप तय करने के लिए एक पर्याप्त तंत्र माने जाने का भी सम्मान करता है।