148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं सोचता हूं कि यह कहना ही उचित है कि इस समय हिंदू और मुस्लिम देश के भाग्य निर्धारण के लिए मानसिक तौर पर अक्षम हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों एक भीड़ की तरह हैं। आपको अनुभव होगा कि भीड़ किसी भौतिक लाभ के कारण आगे नहीं बढ़ती, एक सामूहिक आवेश उसे आगे बढ़ाता है। मनुष्यों के किसी समूह को कुर्बानी के लिए राजी करना, किसी लाभ को गिनाने की अपेक्षाकृत अधिक आसान है। भीड़ असानी से लाभ और हानि को भूलती है, भीड़ के उद्देश्य महान या निम्न हो सकते हैं, सामाजिक अथवा बर्बर, करुण अथवा क्रूर भी, किन्तु सदैव विवेक से इसका कोई वास्ता नहीं होता। सामूहिक भावनाओं में बहकर व्यक्ति अपना सोचना-समझना भूल जाता है। भीड़ को अपनी विरासत स्वीकार करने के लिए तैयार करने की बजाय आत्महत्या के लिए उकसाना अधिक आसान है। मैं आपको सलाह नहीं दूंगा कि आपको कैसे आगे बढ़ना चाहिए। मिशन को भंगी बस्ती और 10, औरगंजेब रोड में जाकर अधिक विवेक और अधिक प्रेरणा मिली है। मै संभवतः ऐसा अंतिम व्यक्ति हूं, जो उक्त विवेक और प्रेरणा के ह्रास के बारे में कुछ कहना चाहता है। किन्तु मैं सोचता हूं कि यदि मिशन ने आयरिश होम रुल के लिए अपने अभियान में लगे ग्लेडस्टोन के लिए चैम्बरलिन द्वारा उपयोग की गई कहावत अनुसार जल्दबाजी में जा रहे बढ़े की करुण ऐनक के समान स्थिति नहीं दिखाई थी और वह डिप्लोमेसी में, जिसे ‘कूलिंग पीरियड’ कहा जाता है की अनुमति देता है, तो वे पाएंगे कि उनके सामने एक आसान स्थिति है।
मिशन प्रमुख दलों और उनके लिए यह एक मुद्दा है, जो प्रमुख दलों में विश्वास रखते हैं।
मैं यह जानने के लिए चिंतित हूं कि अछूतों की समस्या और उनके संवैधानिक रक्षोपायों की मांग को आप कैसे हल करेंगे।
शिमला वार्ता के अंतिम दिन मिशन द्वारा जारी आधिकारिक बयान में यह कहा गया है कि दिल्ली लौटने के बाद कुछ दिनों के भीतर मिशन अपने प्रस्तावित अगले कदम की घोषणा करेगा। वास्तव में, सभी अनुसूचित जाति वर्गों की आंखें इस घोषणा की ओर लगी हैं। मिशन क्या कदम उठाएगा, वहीं उनका भाग्य तय करेगा। मिशन का निर्णय या तो अछूतों के लिए प्रगति, स्वतंत्रता और खुशियों का मार्ग प्रशस्त करेगा अथवा उनके ताबूत में एक कील का काम करेगा। जीवन और मृत्यु का प्रश्न होने के नाते यह अनुचित न होगा कि मैं कुछ क्षणों के लिए आपका ध्यान अछूतों की समस्या की ओर आकर्षित कर सकूं।
- अछूत जिस समस्या का सामना कर रहे हैं वह बहुत उग्र रूप धारण कर