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चुकी है। किन्तु भाग्यवं?श यदि निम्नलिखित तथ्यों को ध्यान में रखा जाए तो इसे समझना आसान है। अछूत चारों ओर से एक बड़ी हिंदू जनसंख्या से घिरे हुए हैं जो उनके विरुद्ध है और जिन्हें उनके विरुद्ध भेदभाव और क्रूर व्यवहार करने में कोई लज्जा नहीं होती। इन बुराइयों, जो रोजाना की बात है, के हल के लिए अछूतों के प्रशासन की सहायता की मांग करनी होगी। इस प्रशासन का स्वभाव और गठन किस प्रकार का है? संक्षेप में, भारत में प्रशासन पूरी तरह से हिंदुओं के हाथ में है। यह उनका एकाधिकार है। ऊपर से नीचे तक सभी कुछ उनके द्वारा नियंत्रित है। ऐसा कोई विभाग नहीं है जहां इनका दबदबा नहीं है। पुलिस, मेजिस्ट्रेसी और राजस्व सेवाओं में वास्तव में किसी भी और प्रशासन की प्रत्येक शाखा में इनका दबदबा है। अगली याद रखने लायक बात यह है कि प्रशासन में शामिल हिंदू केवल गैर-सामाजिक ही नहीं, वास्तव में वे अछूतों के प्रति असामाजिक और शत्रुभाव रखते हैं। अछूतों के प्रति भेदभाव बरतना और उन्हें न केवल कानूनी सुविधाएं दिए जाने से मना करना और वंचित रखना, किन्तु साथ ही उन्हें अन्याय और उत्पीड़न के विरुद्ध बने कानूनों का संरक्षण प्रदान न करना ही उनका उद्देश्यक है। परिणाम यह है कि अछूत, हिंदू जनसंख्या और हिंदू-आधारित प्रशासन के बीच घिर गए हैं, एक उनके विरुद्ध अत्याचार करता है और दूसरा पीडि़तों की बजाय गलती करने वालों को सुरक्षा प्रदान करता है।
इस पृष्ठभूमि में अछूतों के लिए कांग्रेस के स्वराज का क्या अर्थ हो सकता है। इसका केवल एक ही अर्थ हो सकता है, जबकि आज समस्त प्रशासन हिन्दुओं के हाथ में है, स्वराज के अंतर्गत विधायिका और कार्यपालिका में भी हिंदू ही भर जायेंगे। यह कहना अनुचित न होगा कि स्वराज में अछूतों की कठिनाइयां और बढ़ जाएंगी। इसके अतिरिक्त उन्हें अपने विरोधी या उदासीन विधायिका, एक कड़ी कार्यपालिका और अछूतों के प्रति अनियंत्रित और असभ्य तथा व्यवहारिक रूप से कठोर प्रशासन का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस के स्वराज में यदि अन्य दृष्टि से देखें तो, अछूतों का उस अमाननीय उत्पीडन से छुटकारा संभव नहीं है, जो हिन्दुओं और हिन्दुत्व ने उनके लिए निर्धारित किया हुआ है।
मैं आशा करता हूं कि इससे आपको कुछ पता लग सकेगा कि अछूत क्यों इस बात पर जोर दे रहे हैं कि केवल एक ही ऐसा उपाय है जिससे अछूत इस स्वराज को अपने लिए आपदा बनने से रोक सकते हैं, कि विधायिका में उनके प्रतिनिधि हो ताकि वे हिन्दुओं द्वारा अपने प्रति किए जाने वाले गलत कार्यों और अन्याय का विरोध जारी रख सकें, कार्यपालिका में अछूतों के अपने प्रतिनिधि हों ताकि वे अपनी बेहतरी की योजनाएं तैयार करवा सकें और सेवाओ में अछूतों के अपने प्रतिनिधि हों ताकि प्रशासन पूरी तरह उनके विरुद्ध न हो सके। यदि आप अछूतों के सांवैधानिक रक्षोपायों के लिए उनकी न्यायिक मांग को स्वीकार करते हैं, तो आपको यह समझने