48. केबिनेट मिशन के प्रस्तावों के संबंध में ए.वी.अलेक्जेंडर को पत्र - Page 172

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बात पर सही है, मुझे कोई संदेह नहीं कि वह भारत के छह करोड़ अछूतों को पक्ष में होगी और उनकी सुरक्षा के लिए प्रत्येक आवश्यक कार्य करेगी और उनके हाथ में शक्ति नहीं जाने देगी जो अपने धर्म और जीवन दर्शन के कारण शासन करने योग्य नहीं है, और वास्तव में अछूतों के शत्रु हैं। यह अंग्रेजों की ओर से अनुसूचित जातियों, जिनके वे सदैव विश्वासपात्र होने का दावा करते हैं, को अनदेखा करना प्रायश्चित करने से अधिक कुछ नहीं होगा।

  1. अछूतों द्वारा उठाए गए सांवैधानिक रक्षोपायों के प्रश्न पर मिशन की स्पष्ट चुप्पी के कारण बढ़ी व्यग्रता ने मुझे अपना मानसिक बोझ उतारने के लिए प्रेरित किया है। यह व्यग्रता अछूतों और अल्पसंख्यकों को हिज मेजेस्टी की सरकार द्वारा दी गई प्रतिज्ञाओं पर मिशन के रवैये से और गहराई है। इन प्रतिज्ञाओं के संबंध में मिशन का रवैया मुझे लार्ड पार्मस्टन की याद दिलाता है, जिन्होंने कहा था, हमारे कोई स्थायी शत्रु नहीं हैं हमारे कोई स्थाई मित्र नहीं हैं हमारे केवल स्थायी हित हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि यदि अछूतों को ऐसा लगे कि मिशन इस पार्मस्टन उक्ति को अपने मार्गदर्शन के रूप में अपना रहा है तो उसका उन पर कैसा भयावह प्रभाव पड़ेगा। आप ग्रेट ब्रिटेन के शोषित वर्ग से हैं और मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप भारत के छह करोड़ शोषित लोगों के साथ संभावित विश्वासघात को टालने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे। इसलिए मैंने उनका मामला आपके समक्ष रखने पर विचार किया। यदि आप अनुमति दें तो मैं बताना चाहूंगा कि अछूत यह महसूस करते हैं कि मिशन में आपसे बढ़कर उनका कोई और मित्र नहीं है।

भवदीय,

डॉ. भीम राव अम्बेडकर

माननीय ए.वी. एलेक्जेंडर,

सी.एच.एम.पी., सदस्य, केबिनेट मिशन,

वॉयसराय हाउस,

नई दिल्ली

स्रोतः डॉ. अम्बेडकर द्वारा निजी रूप से मुद्रित लीफलेट