154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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केबिनेट मिशन द्वारा जारी बयान के संबंध में लॉर्ड
22, पृथ्वी राज रोड,
नई दिल्ली।
दिनांक 22 मई, 1946
प्रिय लॉर्ड पैथिक-लॉरेन्स,
केबिनेट मिशन द्वारा जारी बयान के बारे में मैंने पाया है कि मुद्दों पर काफी अनिश्चितता बनी हुई है। उनका उल्लेख नीचे किया गया हैः-
(1) बयान के पैराग्राफ 20 में ‘‘अल्पसंख्यक शब्द’’ में क्या अनुसूचित जातियां भी शामिल हैं।
(2) पैराग्राफ 20 में उल्लेख है कि नागरिकों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय अधिकारों और अलग रखे गए क्षेत्रों पर सलाहकार को प्रभावित हितों का पूरा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यह कौन देखेगा कि सलाहकार समिति में क्या वास्तव में प्रभावित हितों का पूरा प्रतिनिधित्व रहता है।
(3) यह देखने के लिए कि क्या समिति में प्रभावित हितों का पूरा प्रतिनिधित्व है, हिज मेजेस्टी की सरकार संविधान सभा से बाहर के उक्त हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों को नामांकन द्वारा समिति में शामिल करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखने का प्रस्ताव करती है? बाहर के व्यक्तियों के नामांकन की आवश्यकता महत्वपूर्ण दिखाई पड़ती है, अन्यथा जनजातीय और अलग रखे गए क्षेत्रों से संविधान सभा के लिए प्रतिनिधित्व पाने का कोई अन्य तरीका नहीं है। यदि नामांकन की आवश्यकता मान ली जाती है, तो क्या संविधान सभा के बाहर से अनुसूचित जाति के सदस्यों के नामांकन के सिद्धांत का पालन किया जाएगा ताकि सलाहकार समिति में अनुसूचित जातियों का पूरा प्रतिनिधित्व हो सके?