156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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28 मई, 1946
आपके 22 मई के पत्र के लिए आपका धन्यवाद, जिसमें आपने हालिया बयान में कुछ मुद्दों के स्पष्टीकरण के लिए कहा है।
आप इस बात की सराहना करेंगे कि प्रतिनिधि मंडल का लक्ष्य एक ऐसा तंत्र स्थापित करना है, जहां स्वतंत्र भारत के लिए भारतीय स्वयं अपना संविधान तैयार कर सकें। हमारे बयान का लक्ष्य एक ऐसा आधार तैयार करना है जहां दल उस उद्देश्य को लेकर एक साथ आएं और हम उम्मीद करते हैं कि इसे स्वीकार किया जाएगा और सर्व संबंधित इस पर काम करेंगे। हमने अपने बयान को छोटा करते हुए इतना सीमित रखा है, जितना हमें उक्त उद्देशीय के लिए आवश्यक प्रतीत हुआ है। अन्य उठने वाले मुद्दों पर संविधान सभा द्वारा किया जाएगा।
हमारा आशय वास्तव में यही था कि बयान के पैरा 20 में उल्लिखित शब्द ‘‘अल्पसंख्यकों’’ में अनुसूचित जातियां भी शामिल हैं। दूसरी ओर, सलाहकार समिति का गठन संविधान सभा द्वारा ही किया जाएगा तथा हमारा अनुमान है कि ऐसी अपेक्षा रखी जाएगी कि यह समिति पूरी तरह प्रतिनिधित्व वाली होनी चाहिए। संविधान सभा के कार्यों में हस्तक्षेप करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। सलाहकार समिति के कार्मिक हमारे बयान के कारण संविधान सभा के सदस्यों की तुलना में सीमित नहीं होंगे।
मैं सोचता हूं कि शनिवार सायं को प्रतिनिधि मंडल द्वारा जारी अगले बयान ये आपके अन्य प्रश्नों का उŸार भी मिल गया होगा, जिसकी एक प्रति मैं संलग्न कर रहा हूं।
श्री अलेक्जेंडर ने मुझे आपके पत्र की पावती और धन्यवाद देने को कहा है, जो हाल ही में आपने उन्हें भेजा है। वह कुछ दिनों के लिए दिल्ली से बाहर सिलोन के दौरे पर गए हैं और वापस आने पर आपको उŸार भिजवाएंगे।
1ः सŸा का हस्तांतरण, खण्ड- VII सं. 399, पृ. 723