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बम्बई सरकार के गृह विभाग ने वरली चॉल और डेल्जली रोड क्षेत्रों में कानून व्यवस्था में सुधार के लिए सख्ती बरतने का निर्णय किया है।
जबकि सरकार ने इस संबंध में प्रांतीय कांग्रेस कमेटी, अनुसूचित जाति संघ और स्थानीय हिदू संगठनों जैसे गैर-सरकारी संगठनों से प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करने के उपायों पर विचार-विमर्श करने का निर्णय किया है।
इस कदम के अनुसरण में डॉ. भीमराव अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार ने श्री मोरारजी देसाई, गृह मंत्री, बम्बई सरकार और बाद में आज सुबह श्री बी.जी. खेर, प्रधानमंत्री से साक्षात्कार के दौरान, डॉ. अम्बेडकर ने वरली की स्थिति की जानकारी मिलने पर स्थिति के प्रति खेद जताया और शांति बहाली के लिए उन्होंने कुछ उपाय सुझाए। उन्होंने मंत्रियों को यह आश्वासन भी दिया कि वे अपने अनुयायियों को शांत रहने को कहेंगे और उन पर अधिक नियंत्रण लागू करेंगे।
उल्लेखनीय है कि डॉ. अम्बेडकर, श्री नगीनदास टी. मास्टर और श्री एस.के.पाटिल ने एक संयुक्त बयान जारी करने का निर्णय किया, जिसमें उस क्षेत्र के सवर्ण हिन्दुओं के व्यक्तियों, कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और अनुसूचित जाति के व्यक्तियों से शांत रहने और सामान्य स्थिति बहाल करने के संयुक्त प्रयास किए जाने की अपील की गई।
माना जाता है कि गृह मंत्री ने डॉ. अम्बेडकर को वरली में चॉल समितियां बनाने का सुझाव दिया, जिसे शांति भंग होने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा और वहीं शांति स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होंगी। यदि स्थिति हाथ से बाहर चली जाती है, तो समितियों के सदस्य जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।
गृह मंत्री से निर्देश मिलने पर, पुलिस प्राधिकारी स्थिति से निबटने के लिए कुछ आदेश लागू कर रहे हैं। यदि स्थिति में गिरावट दिखाई दे तो अपेक्षित उपायों में क्षेत्र के बदमाश व्यक्तियों को पकड़ना और आपात शक्तियों का प्रयोग करना शामिल है।
हालिया स्थिति के अनुसार, चार दिन चले आंदोलन में छह व्यक्ति मारे गए हैं और 70 घायल हुए हैं तथा मिल क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में अभी भी तनाव बना हुआ है।
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श्री राजभोज का बयान
पी.एन.मा. राजभोज, महासचिव, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ ने वरली चॉल का दौरा करने के बाद अपने बयान में कहा है कि इस प्रभावित क्षेत्र में उनके अनुयायियों की स्थिति बहुत कठिन बनी हुई थी। वे मारे जाने के डर से मिलों में