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प्रत्यक्ष कार्रवाई पर संघ कार्यकारिणी का संकल्प
‘‘अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की कार्य-समिति अपने दो हजार शब्दों
के संकल्प में हिज मेजेस्टी की सरकार और इंग्लैण्ड में लेकर पार्टी से अनुसूचित
जाति का मामला सही दिशा में ले जाने और केबिनेट मिशन द्वारा उनके प्रति किए
गए गलत काम को सुधारने का निवेदन करती है। संकल्प के अनुसार, ‘ऐसा न
होने की स्थिति में,’ कार्य-समिति समझती है कि ‘अनुसूचित जातियों के लिए कोई
सीधी कार्रवाई करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।’ संकल्प में आगे कहा
गया है किः ‘‘यदि अनुसूचित जातियों को सन्निकट विध्वंस से बचाने के लिए ऐसी
किसी प्रत्यक्ष कार्रवाई के हालात अपेक्षित होंगे, तो कार्य-समिति यह कार्य अनुसूचित
जातियों से कराने से नहीं हिचकेगी’’।
अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की कार्य-समिति की बैठक 4 जून, 1946
को राव बहादुर एन. शिवराज की अध्यक्षता में डॉ. भीमराव अम्बेडकर, श्रम सदस्य,
भारत सरकार के आवास राज गृह पर आयोजित हुई।
4 जून की सुबह समिति के अध्यक्ष बम्बई सेन्ट्रल पहुंचे और सैलून में जाकर
डॉ. अम्बेडकर से मुलाकात की। देश के विभिन्न हिस्सों से आए संघ के कार्यकर्ता
अपने नेताओं से मिले और उनके साथ देश और समुदाय से संबंधित विभिन्न विषयों
पर बातचीत की। उन्होंने नेताओं से अपने अनकहे दुख-दर्द बयान किए और उस
अकल्पनीय खौफ के बारे में बताया जो अनुसूचित जातियों को सवर्ण हिन्दुओं से
मिला था।
अपराह्न दो बजे कार्य-समिति के सदस्य वार्ता के लिए बैठे। कमेटी के
20 सदस्यों में से 11 सदस्य बैठक में शामिल हुए। इनमें पांच बम्बई से थे, चार
मध्य प्रांत से और एक-एक मद्रास और संयुक्त प्रांतों से थे। डॉ. अम्बेडकर विशेष
आमंत्रिती के रुप में उपस्थित थे। बैठक में संघ के महासचिव, श्री पी.एन. राजभोज