166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जा रहे उचित रक्षोपायों के अधीन होगा। केबिनेट मिशन ने जल्दबाजी में कांग्रेस को अधिकार देते हुए अपने पहले बयान के खंड 22 में इस उपबंध को शामिल करने का साहस नहीं जुटाया यद्यपि यह 1942 में क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों का अंश बना था।
जबकि कार्य-समिति प्रसन्न थी कि मिशन ने अपनी साख पुनः स्थापित की है और उन अंग्रेजों का सम्मान बचाया है, जिनके नाम से अनुसूचित जातियों के प्रति प्रतिज्ञाएं दी गई थी, तथापि कार्य-समिति की मांग है कि निम्नलिखित संदर्भों में केबिनेट मिशन को अपनी योजना में संशोधन करना चाहिएः-
(1) बयान के पैरा 15 में निम्नलिखित खंड को रूप में जोड़ा जाएः-
‘‘(7) अनुसूचित जातियों को पृथक निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से संविधान सभा में प्रतिनिधित्व करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।’’
(8) संविधान में एक ऐसा उपबंध शामिल किया जाए कि सरकार अनुसूचित जातियों के लिए अलग बस्तियां बनाने के लिए बाध्य हो।
पहले बयान के पैरा 20 को इस प्रकार संशोधित किया जाए कि अनुसूचित जाति सदस्यों जिन्होंने प्रारंभिक चुनावों में सर्वाधिक मत प्राप्त किए हों, को सलाहकार समिति का सदस्य बनाया जाए और उन्हें अनुसूचित जाति के पांच अन्य प्रतिनिधियों को सलाहकार परिषद में निर्वाचित करने के लिए अनुज्ञात किया जाए।
कार्य-समिति हिज मेजेस्टी की सरकार और ब्रिटिश लेबर पार्टी को सूचित करना चाहती है कि वे अनुसूचित जातियों के लिए किए जाने वाले कार्यों को सही दिशा दें और केबिनेट मिशन द्वारा उनके प्रति की गई भूलों का तत्काल सुधार किया जाए। कार्य-समिति महसूस करती है कि, ऐसा न होने की स्थिति में, अनुसूचित जातियों द्वारा प्रत्यक्ष कार्रवाई किए जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाएगा। यदि परिस्थिति की मांग हुई, तो अनुसूचित जातियों को इस मकड़जाल से निकालने के लिए कार्य-समिति अनुसूचित जातियों को ऐसा कदम उठाने से कहने में हिचकेगी नहीं।
कार्य-समिति, केबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तावित योजना के कारण अनुसूचित जातियों में व्याप्त भय से अवगत है। कार्य-समिति अनुसूचित जातियों को बताना चाहती है कि वे अपनी वही हिम्मत और पराक्रम बनाए रखें जो उन्होंने पिछले चुनावों में अकेले दम पर कांग्रेस के विरुद्ध लड़ते हुए और वह भी कांग्रेस द्वारा हिंसा, बल-प्रयोग और जानबूझ कर नीचा दिखाने की घटनाओं के बावजूद दिखाया है,