53. प्रत्यक्ष कार्रवाई पर संघ कार्यकारिणी का संकल्प केबिनेट मिशन द्वारा निर्दोष साक्ष्य की अनदेखी - Page 186

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जबकि अन्य सभी दलों ने चुप्पी साधे रखी थी, और उन्हें विश्वास दिलाया था कि भयाक्रांत होने, हिम्मत छोड़ने और एकता खोने की कोई आवश्यकता नहीं क्योंकि वे न्याय और मानवता के लिए अवाज उठा रहे हैं और शत्रुओं के समूह होते हुए भी उनकी विजय सुनिश्चित है।

  1. अतः कार्य-समिति एक कार्रवाई-परिषद के गठन के लिए अध्यक्ष को प्राधिकृत करती है और उसे प्रत्यक्ष कार्रवाई करने और उसे आरंभ करने का सबसे प्रभावी समय निर्धारित करने का कार्य सौंपती है।

  2. कार्य-समिति ने पाया है किः

(1) सवर्ण हिन्दुओं द्वारा अनुसूचित जातियों के प्रति अन्याय और उत्पीड़न का कार्य पूरे भारत के गांवों और शहरों में इस कारण किया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़ा है, और जिस कारण से अनेक लोगों की मृत्यु हुई है और जख्मी हुए हैं;

(2) सवर्ण हिन्दुओं का पक्ष लेते हुए पुलिस एक शर्मनाक भूमिका अदा कर रही है और अनुसूचित जाति के निर्दोष पुरुषों और महिलाओं को रोककर उन्हें गिरफ्तार कर रही है।

(3) राशन की दुकानों से अनुसूचित जाति के लोगों को राशन देने से इन्कार किए जाने की भूमिका;

(4) समाचार-पत्रों द्वारा भी चुप्पी साधे रखे जाने का षडयंत्र खेला जा रहा है, जो निर्दोष पुरुषों और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के बारे में कुछ नहीं कहते।

(5) अनुसूचित जातियों के जान-माल की रक्षा करने में प्रान्तीय सरकारों ने सबसे अधिक भेदभाव दिखाया है।

कार्य-समिति यह महसूस करते हुए कोई सहायता नहीं कर सकती कि बहुसंख्यक समुदाय का कार्य इस शक के दायरे से बाहर नहीं जा सकता कि हिन्दू समुदाय को शक्ति मिलने पर उस पर कैसे विश्वास किया जा सकेगा कि यदि बहुसंख्यक वर्ग अपनी नैतिकता में सुधार नहीं लाता है, तो अनुसूचित जातियों को अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा’’।

1ःजय भीम, दिनांक 11 एवं 18 जून, 1946