56. क्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के अछूतों का प्रतिनिधित्व करती है? - Page 191

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सर्वप्रथम, पार्टियां, जैसे अनुसूचित जातियां, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग किया था, अन्य लोगों की तुलना में घाटे में थीं।

दूसरे, इंडियन नेशनल आर्मी का मुकदमा चुनाव के साथ ही शुरू हो गया जिससे कांग्रेस लाभ की स्थिति में रही और अन्य दलों को नुकसान हुआ। यदि इंडियन नेशनल आर्मी का मुकदमा चुनाव के समय आरंभ न हुआ होता तो कांग्रेस का अपना स्टॉक इतना कम था, कि वह चुनाव पूरी तरह से हार जाती।

इन दो कारणों के अलावा, चुनाव परिणामों को परीक्षण के तौर पर क्यों नहीं लिया गया, इसका एक विशेष कारण है, इसका उपयोग यह जानने के लिए क्यों नहीं किया गया कि क्या कांग्रेस ने अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व किया अथवा नहीं। वह कारण ऐसा है कि अनुसूचित जातियों की सीटों को संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों में, जहां हिन्दू भी मत देते हैं, को अंतिम रूप से महत्व देता। हिन्दू मत प्रभावशाली होने के कारण कांग्रेस के लिए आसान है कि वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को पूरी तरह हिन्दू मतों से जिता दे। प्रान्तीय विधान सभा के चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर खड़े हुए अनुसूचित जाति उम्मीदवार, हिन्दू मतों के द्वारा विजयी हुए, न कि अनुसूचित जातियों के मतों से यह एक ऐसा तथ्य है, जिसे केबिनेट मिशन भी मना करने को सक्षम नहीं हो पाएगा।

असली परीक्षा, जिसमें यह पता लगाया जा सके कि क्या कांग्रेस अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करती है, प्रारंभिक चुनावों के परिणामों की जांच के द्वारा होगी, जिसके उपरांत अंतिम चुनाव हुए, प्रारंभिक चुनावों में अनुसूचित जातियों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र थे, जिनमें हिन्दुओं को मत डालने का कोई अधिकार नहीं है। अतः प्रारंभिक चुनाव अनुसूचित जातियों की सच्ची भावनाओं को प्रदर्शित करते हैं। प्रारंभिक चुनावों का परिण् ाम क्या दर्शाता है? क्या यह दर्शाता है कि अनुसूचित जातियां कांग्रेस के साथ हैं?

अनुसूचित जातियों को प्रान्तीय विधान मंडलों में 151 सीटें आवंटित की गई थीं। इन सीटों को सिंध और उŸार-पश्चिम सीमांत प्रांतों के अलावा विभिन्न प्रान्तों में बांटा गया है।

प्रारंभिक चुनाव बाध्यकारी नहीं है। यह तभी बाध्यकारी होते हैं जब एक सीट पर चार से अधिक उम्मीदवार खड़े हों। पिछले प्रारंभिक चुनावों में, जिनके बाद अंतिम चुनाव हुए, 151 चुनाव क्षेत्रों में से 40 बाध्यकारी बने।

उन्हें निम्नानुसार बांटा गया थाः-

मद्रास 10

बम्बई 03