57. किसी अन्य की तुलना में, मैं बड़ा राष्ट्रवादी हूँ - Page 208

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है। डॉ. अम्बेडकर ने बताया : मैं यह बात स्पष्ट करना चाहूँगा कि इस देश की अनुसूचित जातियाँ सोचती हैं कि गांधी जी ब्रिटिश केबिनेट के दीर्घावधि प्रस्तावों को स्वीकार करने को मुख्य रूप से इस आधार पर सहमत थे कि ब्रिटिश मंत्री अनुसूचित जातियों की अनदेखा करने को सहमत थे। ऐसा इसलिए है कि उनके संदिग्ध चरित्रा, जिसके बारे में कांग्रेसी नेताओं ने भी हाल ही में काफी कुछ कहा है, के होतेहुए भी गांधी जी ने दीर्घावधि प्रस्तावों में बहुत लाभ देखा। ब्रिटिश सरकार कांग्रेस का विस्त्रास जीतने के लिए अनुसूचित जातियों की कुर्बानी के लिए सहमत हो गई, और उन्होंने दृढ़तापूर्वक स्वीकार किया मैं इसे पूर्णतया विश्वासघात मानता हूँ।

‘‘हम चाहते हैं- यह देश उतनी ही प्रगति करे, जैसा कोई अन्य देश करता है। हम इसका रास्ता अवरूद्ध नहीं करना चाहते है। हम चाहते हैं कि भावी भारत में हमारी स्थिति को सुरक्षा प्रदान की जाए।’’

21 जुलाई, 1946 को पूना स्थित अहिल्याश्रम में अछूतों की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के बाद में डॉ. अम्बेडकर ने एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित किया। प्रेस सम्मेलन की रिपोर्ट इस प्रकार है- संपादक मंडल

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने आज पूना में एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए, कांग्रेस से एक खुली घोषणा की माँग की कि भारत के भावी संविधान में 6 करोड़ अछूतों के हितों की रक्षा के लिए उसने क्या प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने ब्लू-पिं्रट जारी करने और साधारण शब्दों में कोई वादे न किए जाने की माँग की।

पुना में शुरू किया गया सत्याग्रह देशव्यापी संघर्ष की एक शुरूआत थी, ताकि अनुसूचित के राजनैतिक अधिकार सुरक्षित किए जा सकें। उन्हांने दावा किया कि पूना कि सत्याग्रह एक उच्च नैतिक तथ्य को लेकर चलाया जा रहा था और स्वयंसेवी लोगों के समस्त समूहों का अहिंसावादी व्यवहार गाँधी जी तक के लिए एक सबक था, जो स्वयं को ‘सत्याग्रह में स्नातक’ मानते थे। तथापि, उन्होंने एक चेतावनी जारी की कि जब नैतिक संसाधन समापत हो जाएगे तो वे अपना विरोध दर्ज करने के लिए ‘अन्य साधन खोजेंगे।’ सत्ता के उत्तराधिकारी’‘

केबिनेट मिशन ने किया था कि इस देश में ब्रिटिश सत्ता, प्राधिकार और प्रभुसत्ता के उत्तराधिकारी केवल दो समुदाय-मुस्लिम और सवर्ण हिन्दू ही थे प्रस्तावित संविधान सभा में सभी प्रश्नों का केवल सवर्ण हिंदुओं के साधारण बहुमत वाले मतों