192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वह सही अवसर पर स्वयं ‘‘सत्याग्रह’’ में भाग लेंगे। इस समय आंदोलन के ‘‘जनरल स्टाफ’’ में कंमाडरों की संख्या कम है। जब शीर्षस्थ कमांडरों और हजारों अनुयायियों का ‘‘आत्मविश्वास’’ साथ होगा, तो डॉ. अम्बेडकर इसे आवश्यक नहीं मानते कि न्यायालय द्वारा उन्हें गिरफ्तार किया जा सकेगा। ‘‘किन्तु’’, उन्होंने कहा, ‘‘मैं जेल के जीवन से डरता नहीं हूं। मैं केवल शानदार दिखने वाली और गैर-नियोजित कार्रवाई में विश्वास नहीं करता’’।
यह पूछे जाने पर कि उन्हें कांग्रेस से किस तरह के ब्लू-प्रिंट जारी किए जाने की उम्मीद है, डॉ. अम्बेडकर ने उŸार दिया किः पिछले बीस वर्षों में कांग्रेस ने हमारे लिए क्या रचनात्मक कार्य किया है। अब वे ब्रिटिश सŸा और प्रभाव के उŸाराधिकारी हैं। हमें उनसे यह पूछने का अधिकार है कि नए संविधान में उन्होंने हमारे लिए क्या प्रस्ताव रखे हैं। हमें झूठे वायदों और अनर्थक बातों में कोई विश्वास नहीं है। हम कांग्रेस की निष्ठा का ठोस सबूत चाहते हैं कि वह हमारे साथ न्यायप्रिय और सही बर्ताव करेगी। पहले उन्हें आसमानों की ऊंचाई से नीचे तो आने दें।
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क्या कांग्रेस को एक पूर्णतया संतोषजनक ब्लू-प्रिंट जारी करना चाहिए, क्या आप अपने लोगों से उस निकाय में शामिल होने को कहने के लिए तैयार होंगे? डॉ. अम्बेडकर से अलग प्रश्न पूछा गया।
‘बिल्कुल नहीं’ उन्होंने उŸार दिया। ‘‘कांग्रेस की तुलना में हमारी सामाजिक और राजनीतिक स्थिति में मूलतः अधिक गिरावट आई है। हम गरीब वर्गों में से भी सबसे गरीब का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम धरती मां के बेटे हैं, सच्चे जन हैं। अतः एक कपटी-सामाजिक संगठन में शामिल होने, जैसा कांग्रेस ने किया है, पर विचार नहीं कर सकते’’।
तथापि, यदि कांग्रेस ने अनुसूचित जाति-वर्गों से निष्कपट व्यवहार किया हो, और देश के भले के लिए सच्चा संघर्ष करने को तैयार थी, तो वह बेहिचक उनके सहयोग के प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे।
डॉ. अम्बेडकर ने यह अस्वीकार किया कि उन्होंने अपने पूना के प्रेस सम्मेलन में कहा था कि उनके दल को मुस्लिम लोग की ओर से किसी भी मुद्दे पर किसी भी रूप में कोई आश्वासन दिए गए थे। मुस्लिम प्रान्तों में सत्याग्रह अभियानों की शुरुआत के लिए उनकी अनिच्छा इस पक्ष में आगे बढ़ती है कि मुस्लिमों ने अनुसूचित जाति वर्गों को कोई हानि नहीं पहुंचाई थी।