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हालिया आम चुनाव में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के भाग्य के संबंध में संकेत देते हुए, उन्होंने इस बात को समझाया कि यह शक्ति का वास्तविक परीक्षण नहीं था। उनके लोगों ने मत तो सभी जीते किन्तु सीटें गंवा दी क्योंकि हिन्दू मतों ने उनकी जीत के अवसर धूमिल कर दिए।
हम अपनी स्वतंत्रता अपने वजूद के लिए लड़ रहे हैं, डॉ. अम्बेडकर ने अंत में महसूस करते हुए कहा। एक बड़ा समुदाय होते हुए भी, हमें दशकों से मूलभूत न्याय से वंचित रखा गया है। हमारे साथ दुर्व्यवहार किया गया है, हमारी हर मांग की उपेक्षा की गई है। किसी भी ओर से हमें कोई सहानुभूति नहीं मिली है। हमने न्याय और निष्पक्षता चाही है। आओ हम इनकी प्राप्ति का प्रयास करें, नहीं तो ईश्वर गवाह है, परिणाम बहुत भयंकर होंगे, तस्वीर का रुख चाहे कुछ भी हो।
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एसोसिएटिड प्रेस को दिए गए एक साक्षात्कार में भीमराव अम्बेडकर ने आज कहा कि अनुसूचित जाति संघ पर सत्याग्रहियों की संख्या घटाकर बहुत थोड़ी करने के लिए दबाव डाला गया था, क्योंकि उनके भोजन आदि की दिक्कतें थीं, ‘‘हमें भारत के प्रत्येक भाग से, और यहां तक कि बर्मा और मलाया से भी, टेलीग्राम और पत्र मिले हैं- जिनमें पूना आकर सत्याग्रह आंदोलन में शामिल होने के प्रस्ताव हैं। किन्तु उनके भोजन और आवास की व्यवस्था में वास्तव में दिक्कते हैं। राशन की समस्या के कारण, ‘‘यह संभव नहीं है।’’ आज से लेकर आगे के लिए व्यक्तियों के जो छोटे-छोटे समूह, जिला न्यायधीश के द्वारा विधान सभा के लिए लगाए गए प्रतिबंध को तोड़ते हुए, विधान सभा परिक्षेत्र में सत्याग्रह करेंगे, पूना में उन पर मुश्ती फंड से खर्च किया जाएगा। इसके अलावा, लोगों को अपने साथ चार-पांच दिन का राशन लाने का अनुरोध किया गया है।
डॉ. अम्बेडकर ने आंदोलन के आयोजकों से कहा है कि जब कभी उन्हें उनकी आवश्यकता जान पड़े, तो वे पूना आने के लिए तैयार रहेंगे।’’
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अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की लखनऊ शाखा के 140 से अधिक सदस्य आज उस समय गिरफ्तार कर लिए गए जब वे पूना समझौते का विरोध करने के लिए जन सत्याग्रह कर रहे थे।