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अपनी हैसियत का दुरूपयोग किया है। केबिनेट मिशन ने अनुसूचित जातियों के प्रति जो रवैया अपनाया वह कांग्रेस के षडयंत्र का सीधा परिणाम है और, इसलिए संघ कांग्रेस के विरुद्ध भी सीधी कार्रवाई करने के लिए बाध्य है’’।
श्री राजभोज ने बताया कि संघर्ष की शुरुआत के लिए मार्ग सुझाने के लिए जून में नियुक्त की गई कार्रवाई परिषद प्रत्येक प्रान्तीय इकाई को संघर्ष के तरीकों के बारे में जानकारी देगी। किन्तु इस दौरान उन्होंने आगे बताया कि बम्बई प्रान्त अनुसूचित जाति संघ ने निर्णय किया है कि संघर्ष के पहले कदम के रूप में 15 जुलाई को पूना में जिला न्यायाधीश के आदेश को तोड़ा जाएगा। श्री राजभोज ने सभी का आहृन किया कि आंदोलन में भाग लेने को इच्छुक व्यक्ति अपना नाम पूना स्थित बम्बई प्रान्त अनुसूचित जाति संघ कार्यालय को भिजवा दें, जहां श्री बी.के. गायकवाड़, अध्यक्ष इस कार्य के प्रभारी हैं।
16 दिसंबर, 1946 को जय भीम में प्रकाशित एक अन्य प्रेस साक्षात्कार में डॉ. अम्बेडकर ने अन्य विचारों का हवाला दिया जिनमें कुछ मुद्दे उनके प्रारंभिक साक्षात्कारों में दिए गए विचारों से मेल खाते हैं-----------संपादक गण।
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एक प्रेस साक्षात्कार के दौरान डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने मांग की कि कांग्रेस को एक ब्लू-प्रिंट जारी करना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट किया गया हो कि वह देश के अनुसूचित जाति के 6 करोड़ लोगों के भविष्य के लिए क्या करने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति संघ द्वारा पूना में शरू किए गए सत्याग्रह का उद्देश्य कांग्रेस से इस प्रश्न का उŸार जानना था कि भारत के भावी संविधान में अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस अपनी योजना की खुली घोषणा करे।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि ब्रिटिश केबिनेट मिशन ने सही अथवा गलत जो भी निर्णय किया------अनुसूचित जाति ने उसे गलत और अन्याय ही समझा है----कि मुस्लिम और सवर्ण हिदू भारत में ब्रिटिश सŸा, प्राधिकार और प्रभुत्व के केवल दो ही उŸाराधिकारी थे।
अनुसूचित जातियों का मुस्लिम वर्गों से कोई झगड़ा नहीं था, क्योंकि वे अनुसूचित जातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपने आशय की घोषणा करने के लिए तैयार थे, और इसलिए, ऐसे प्रान्तों में जहां मुस्लिम सŸा में थे, वहां कोई सत्याग्रह नहीं होगा। हालांकि, इस प्रश्न पर कांग्रेस ने अब तक चुप्पी साध रखी थी। संविधान सभा