57. किसी अन्य की तुलना में, मैं बड़ा राष्ट्रवादी हूँ - Page 215

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में तीन-चौथाई बहुमत के साथ कांग्रेस अपने बहुमत के साथ अनुसूचित जातियों के अधिकारों और हितों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर निर्णय ले सकेगी। अतः अनुसूचित जातियां कांग्रेस से अपने प्रश्न का उŸार मांगने की पात्र थीं।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि यदि अनुसूचित जातियां बम्बई सरकार को तंग कर रही थीं, तो इसका कारण उसका कांग्रेसी तंत्र का अभिन्न हिस्सा होना था। श्री बी.जी. खेर ने अपने बयान में सुझाव दिया था कि वर्तमान सत्याग्रह का कारण संघ का हतोत्साहित होना था क्योंकि पिछले चुनाव में उनकी हार हुई थी। डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि ‘‘आंदोलन के लिए श्री खेर अपने, उच्च अथवा निम्न, कारणों की सूचना देने के लिए स्वतंत्र थे, किन्तु जहां तक उनका संबंध था, वे यह स्पष्ट करना चाहते थे कि वह राजनीति अथवा सार्वजनिक जीवन में ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिसे वह सार्वजनिक तौर पर न्यायोचित न ठहरा सकें’’। हालांकि, यह कहना गलत होगा कि अनुसूचित जाति वर्गों में एक प्रकार की निराशा का भाव उत्पन्न हो चुका था। उन्होंने शत-प्रतिशत सीटें गंवाई थीं।

‘‘यदि अनुसूचित जातियों में हमारे उम्मीदवारों के विरूद्ध और कांग्रेस द्वारा नामित उम्मीदवारों के पक्ष में वोट डाला होता, तो निराश होती। वह हमारे पतन का कारण होता। किन्तु कांग्रेस के उन उम्मीदवारो को चार प्रतिशत से अधिक मत नहीं मिले, जो सवर्ण हिन्दुओं के मतों के बल पर आ पाए थे। वह हमारी पराजय नहीं बल्कि हमारी विजय थी। परन्तु वास्तविकता यह है कि हम इन चुनावों में हारे, इसका यह अर्थ नहीं कि हम हर बार हारने जा रहे हैं’’।

अनुसूचित जातियों की मांगों पर आते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि उनमें से एक मांग पूना समझौते को समाप्त किया जाना था, उन्होंने पूछा ‘‘हमें इसके विरुद्ध प्रदर्शन क्यों नहीं करना चाहिए?’’ ‘‘विश्व की कोई भी संधि पवित्र रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती। पूना समझौता उन्हीं लोगों के लिए राजनैतिक अधिकार छीने जाने का माध्यम बनकर आया, जिनके हित में यह बना था। हम चाहते हैं कि समुदाय की जबरदस्ती की राय दूसरे समुदाय पर न थोपी जाए। जब भी देश में प्रारंभिक चुनाव हुए संघ के उम्मीदवार के सामने कोई कांग्रेसी उम्मीदवार जीत नहीं पाया। किंतु आम चुनावों में समुदाय विशेष द्वारा चुने गए उम्मीदवार नकार दिए गए और वे दूसरे दल के हाथों की कठपुतली बनकर ‘‘हिदू मतों’’ के कारण शीर्ष पर आ गए।’’ डॉ. अम्बेडकर ने मांग की कि समुदाय के राजनैतिक संरक्षण के लिए की गई कोई भी व्यवस्था ‘‘मूल-रहित और घूर्तता-रहित’’ होनी चाहिए।

डॉ. अम्बेडकर ने ऐसे लोगों से अनुसूचित जाति के सत्याग्रह अभियान से जुड़ने