57. किसी अन्य की तुलना में, मैं बड़ा राष्ट्रवादी हूँ - Page 216

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को कहा, जिन्हें आम जनता के हितों की चिंता है। यह आवश्यक नहीं कि स्वतंत्रता का अर्थ सभी को आजादी और स्वतंत्रता ही हो। शक्ति उस थोड़ी थानाशाही जनता के हाथ में भी जा सकती जो अधिक उत्पीडन करे जिसका उन्होंने पहले अनुभव किया हो। डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की कि हम संघर्ष करने के लिए तैयार हैं, चाहे नैतिक तौर पर उसका अंत होने तक हमें मदद मिले चाहे नहीं मिले। यदि नैतिक साधन समाप्त हो जाते हैं, तो हम अन्य उपायों का सहारा लेंगे। एक जनता की स्वतंत्रता उसकी प्राप्ति के लिए किए जाने वाले साधनों की पवित्रता से बड़ी होती है।

डॉ. अम्बेडकर ने अपने लोगों के संघर्ष को अंत तक ले जाने के लिए उहैलित किया। कांग्रेस के हरिजन नेता जिन्होंने सदैव अम्बेडकर के श्रम और संघर्ष का फायदा उठाया, डॉ. अम्बेडकर के विद्रोह के विरोध में बोले और उनका समर्थन किया जो सदैव हरिजनों की मांगों के विरोधी थे। यह अपने लाभ पहुंचाने वाले को आंखे दिखाने जैसा था।

इस सत्याग्रह के संबंध में गांधी ने हरिजन में लिखा कि अम्बेडकर द्वारा प्रदर्शित तमाशे में सत्याग्रह की पैरोडी थी; और यदि इसका माध्यम अहिंसा थी तो उदे्श्य वास्तव में संदिग्ध था।

सत्याग्रह आंदोलन निर्बाध रूप से एक पखवाड़े तक चला, और इसके दबाव के चलते सरकार को अपना पूना असेम्बली सत्र रद्द करना पड़ा। कांग्रेसी नेताओं को अम्बेडकर के साथ बैठकर बात करने की आवश्यकता महसूस हुई। अतः बम्बई प्रान्तीय कांग्रेस समिति के प्रमुख एस.के. पाटिल सिद्धार्थ कालेज में डॉ. अम्बेडकर से मिलने पहुंचेः और एन.एस. जोशी के साथ वे दोनों 27 जुलाई को सरदार पटेल से मिले। बातचीत एक घंटे से अधिक चली, यह बातचीत संविधान सभा में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व और पूना सत्याग्रह के संबंध में थी। ऐसा लगा कि उनके बीच कोई सहमति नहीं बन सकी क्योंकि 8 अगस्त को अनुसूचित जाति के प्रमुख नेताओं यथा गायकवाड़ और राजभोज के नेतृत्व में अनुसूचित जातियों का एक जुलूस अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक के लिए चला, यह बैठक वर्धा में आयोजित हुई थी।

कुछ समय बाद, डॉ. अम्बेडकर ने सरदार पटेल को पत्र लिखा कि वह समझते हैं कि देश किसी भी व्यक्ति से बड़ा होता है, चाहे वह कितना ही महान क्यों न हो उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति एक कांग्रेसी हुए बिना बड़ा राष्ट्रवादी बन सकता है और उन्होंने आगे कहा कि वह किसी भी कांग्रेसी नेता की तुलना में बड़े राष्ट्रवादी थे।