204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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डॉ. भीम राव अम्बेडकर, जो अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की बैठक के सिलसिले में पूना में थे, द्वारा केंद्र में नव-गठित अंतरिम सरकार में अनुसूचित जातियों को ‘‘अपर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने पर अंसतोष व्यक्त किया गया था’’।
अंतरिम सरकार के गठन के संबंध में साक्षात्कार देते समय डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा ‘‘कार्यकारी परिषद में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के बारे में कांग्रेस द्वारा अपनाए गए रवैये को देखते हुए वायसराय द्वारा गठित अंतरिम सरकार न तो अनुसूचित जातियों से अपनी आज्ञा मनवाने और न ही आदर कराने की हकदार है’’।
डॉ. अम्बेडकर ने कहाः ब्रिटिश सरकार और कांग्रेस के बीच एक सोची-समझी साजिश दिखाई पड़ती है कि अनुसूचित जातियां कार्यकारी परिषद के बारे में कुछ न बोल सकें। हम सोचते हैं कि पाकिस्तान की मांग का औचित्य है, किंतु इसमें कोई औचित्य नहीं है कि मुस्लिमों की तुलना सवर्ण हिन्दुओं से की जाए, और यह औचित्य भी दिखाई नहीं पड़ता कि अन्य अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व केवल चार सीटों तक सीमित कर दिया जाए, जबकि उनमें से एक अर्थात अनुसूचित जाति की संख्या मुस्लिमों की कुल जनसंख्या के 50 प्रतिशत से भी अधिक है। इससे भी अधिक ब्रिटिश सरकार ने, जहां तक मुस्लिमों के दावे का संबंध है, उन्हें 331/3 प्रतिशत का दावा करें।
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि ‘‘शिमला सम्मेलन में वायसराय ने सहमति दी थी कि उन्हें दो सीटें दी जानी चाहिए, और अनुसूचित जाति ने यद्यपि तीन सीटों के लिए दबाव दिया था, अंतरिम व्यवस्था के लिए वह दो सीटें स्वीकार करने के लिए तैयार थी। उस समय कांग्रेस अनुसूचित जातियों को दो सीटें देने को तैयार थी। इस परिप्रेक्ष्य में अनुसूचित जातियों के लिए यह गहन चिन्ता का विषय है कि क्या वह कांग्रेस द्वारा प्रायोजित अंतरिम सरकार को सहयोग दें, जबकि वे जानते हैं कि कांग्रेस ने उनके साथ बहुत अन्याय किया है। संघ का यह विचार है कि कार्यकारी परिषद में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व के संबंध में कांग्रेस के हालिया रवैये को