205
देखते हुए, वायसराय द्वारा गठित यह सरकार न तो अनुसूचित जातियों से अपनी आज्ञा मनवाने और न ही आदर कराने की हकदार है’’।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा ‘‘इससे भी अधिक आश्चर्य की बात यह है कि मि. जगजीवन राम ने कार्यकारी परिषद में शामिल होने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। जब मैंने कार्यकारी परिषद में अनुसूचित जाति के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के बारे में प्रधानमंत्री को एक विरोध भरा तार संदेश भेजा, तो मि. जगजीवन राम ने स्वयं भी प्रेस के लिए एक बयान जारी किया जिसमें कार्यकारी परिषद में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के मेरे दावे का समर्थन किया गया था। इस तथ्य के होते हुए भी कि कांग्रेस अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व बढ़ाए जाने के लिए सहमत नहीं थी, क्या मि. जगजीवन राम को आमंत्रण स्वीकार करना चाहिए था। यह इस बात को दर्शाता है कि अनुसूचित जाति के अधिकारों की लड़ाई में उनसे कितनी उम्मीद की जा सकती है। यह ईमानदारी एवं निष्ठा परखने का उचित अवसर है जो जगजीवन राम कांग्रेस पार्टी में हैं और अनुसूचित के प्रतिनिधि होने का यह दिखावा करते हैं कि उन पर यह देखे जाने का भरोसा किया जा सकता है कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों से गलत बर्ताव न करे’’।
संघ द्वारा शुरू किए गए आंदोलन का हवाला देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि अपने उचित अधिकारो की प्राप्ति के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने घोषणा की कि ‘‘हम अधीन तो हो सकते हैं, किन्तु हम आत्मसमर्पण नहीं करेंगे’’।
जय भीमः दिनांक 16 सितंबर, 1946