61. लार्ड पैथिक-लॉरेन्स द्वारा प्रधानमंत्री श्री एटली को लिखा गया पत्र - Page 225

206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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इंडिया ऑफिस,

3 सितंबर, 1946

सेक्रेटरी ऑफ स्टेट्स का कार्यवृŸाः क्रम सं. 48/46

प्रधान मंत्री महोदय,

आपने डॉ. अम्बेडकर द्वारा आपको लिखे गए 12 अगस्त, 1946 के पत्र पर मेरे विचार जानने चाहे हैं।

  1. उनके दूसरे पैरा के संबंध में आप ज्ञापन में दलित वर्गों के चुनाव परिणामों का विश्लेषण देख सकते हैं, जो मेरे निजी सचिव ने डॉ. अम्बेडकर के पिछले पत्र के उŸार के रूप में आपको 26 जुलाई को भेजा था। संक्षेप में, तथ्य यह है कि प्रारंभिक चुनावों में कांग्रेस को डॉ. अम्बेडकर के संघ की तुलना में अधिक मत मिले, जबकि आजाद उम्मीदवारो ने भी बड़े अनुपात में मत प्राप्त किए, जो डॉ. अम्बेडकर के समर्थक हो भी सकते हैं और नहीं भी किन्तु, इसके अलावा, कांग्रेस ने दो-तिहाई सीटें निर्विरोध रूप से जीत लीं। आंकड़े, वास्तव में, निष्कर्षात्मक नहीं हैं किन्तु कॉमन्स में प्रथम लॉर्ड का बयान में ‘‘सच्चाई की कोई बुनियाद नहीं है’’ कहना न्यायसंगत न होगा जबकि मेरा मानना है कि यह अधिक सकारात्मक था।

  2. डॉ. अम्बेडकर के पत्र के पैरा 3 के संबंध में, हाउस ऑफ कॉमन्स में यह नहीं बताया गया था कि उनका प्रभाव बम्बई और मध्य प्रांतों तक सीमित था। वह प्रेजिडेंट ऑफ बोर्ड ऑफ ट्रेड के भाषण का हवाला दे रहे हैं, जिसमें वास्तविक शब्दों का उपयोग किया गया था कि ‘‘डॉ. अम्बेडकर का संगठन अपने स्वभाव को लेकर काफी हद तक स्थानीय स्तर का है (कांग्रेसी संगठन की तुलना में) जो मुख्यतः बम्बई और मध्य प्रांतों तक केन्द्रित है’’। मैंने पूछताछ कराई है कि संविधान सभा के लिए बंगाल में हुए चुनावों में क्या हुआ था, जिसमें वास्तव में, आनुपातिक प्रतिनिधित्व रहा। डॉ. अम्बेडकर ने प्रथम प्राथमिकता वाले पांच मत प्राप्त किए। शरत चन्द्र बोस ने भी प्रथम प्राथमिकता वाले पांच मत प्राप्त किए। बंगाल में चुनाव के लिए चार सीट