61. लार्ड पैथिक-लॉरेन्स द्वारा प्रधानमंत्री श्री एटली को लिखा गया पत्र - Page 227

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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इंडिया ऑफिस, 9 सिंतबर, 1946

सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का कार्यवृŸाः क्र.स.51/46

प्रधान मंत्री महोदय,

संविधान सभा की सलाहकार समिति में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व के संबंध में आपका व्यक्तिगत कार्यवृŸा सं.एम.296/46, दिनांक 4 सितंबर।

  1. यह वस्तुतः मिशन की राय थी कि सलाहकार समिति में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व होना चाहिए और मैंने इस बारे में भारत में डॉ. अम्बेडकर को एक पत्र द्वारा जानकारी दी है। उन्हें आपके 1 अगस्त को भेजे गए उŸार के तीसरे पैरा में आपने डॉ. अम्बेडकर को स्पष्ट किया है, यद्यपि हिज मेजेस्टी की सरकार स्वयं अनुसूचित जाति को एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग मानती है, जिसे अल्पसंख्यक सलाहकार समिति में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, वे इस बारे में सार्वजनिक घोषणा किए जाने के उनके अनुरोध को नहीं मान सकते, क्योंकि ऐसी किसी भी घोषणा मेंः

(क़) उन अन्य सभी तत्वों का उल्लेख होना चाहिए जिन्हें हिज मेजेस्टी की सरकार समझती है कि अल्पसंख्यक होने के नाते सलाहकार समिति में शामिल किया जाना चाहिए; और

(ख) संविधान सभा की कार्रवाई की स्वतंत्रता के साथ हस्तक्षेप के प्रयास के रूप में समझा जा सकता है।

  1. तथापि, स्थिति यह है कि हमने सलाहकार समिति के गठन का निर्णय संविधान सभा पर छोड़ दिया है और अब हम इसका वर्णन नहीं कर सकते। मैं नहीं सोचता कि हम हाउस को बहकाने के दोषी हैं, बोर्ड ऑफ ट्रेड के अध्यक्ष के 18 जुलाई के भाषण में जैसा कि स्पष्ट उल्लेख था, जिसका संबंधित पैरा मेरे 3 सितंबर को आपको भेजे गए कार्यवृŸा में संलग्न था।

  2. क्या पृथक राजनैतिक प्रतिनिधित्व के उद्देश्य के लिए अनुसूचित जाति को एक अल्पसंख्यक वर्ग मानते रहना जारी रखा जाए, इस प्रश्न के विवाद का एक लम्बा इतिहास है। गांधी ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा बाद वाले विचार के