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प्रचार में बताया। किन्तु जब मैंने अपने 3 सितंबर के कार्यवृŸा के पैरा 4 में यह उल्लेख किया, कि पृथक राजनैतिक प्रतिनिधित्व के उद्देश्य से कांग्रेस अनुसूचित जाति को अल्पसंख्यक नहीं मानती, तो उस समय आजाद के वायसराय को भेजे गए 25 जून * (हमारे 25 मई के बयान के कुछ सप्ताह बाद) के पत्र का अंश विशेष रूप से मेरे मस्तिष्क में था जिसका डॉ. अम्बेडकर ने आपको भेजे गए अपने दोनों पत्रों में उल्लेख किया है। इसमें आजाद ने कहा है कि कांग्रेस ने ‘‘इस विचार को अस्वीकार किया है कि अनुसूचित जातियां एक अल्पसंख्यक वर्ग हैं और उन्हें पूर्ण रूप से हिन्दू समाज का एक हिस्सा माना है’’ (कमा.6861 के पृ.23 का दूसरा पैरा)। यह बयान मि. जिन्ना को दिए वायसराय के आश्वासन का संदर्भ था कि वह अंतरिम सरकार में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों को आबंटित सीटों की किन्हीं रिक्तियों को भरने के पहले मुख्य दलों से परामर्श करेंगे। कुल मिलाकर यह अस्वाभाविक नहीं था कि कांग्रेस द्वारा अनुसूचित जातियों को अपना उŸारदायित्व मानकर उनका सम्मान किया जाए और एक अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि की नियुक्ति में मुस्लिम लीग के प्रभाव पर आपिŸा की जाए।
यह माने जाने का कोई सकारात्मक कारण नहीं है कि कांग्रेस सलाहकार समिति में पर्याप्त संख्या में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करना चाहेगी। उन्हें चिंता है कि उन्हें भारत और विदेश दोनों जगहों से आलोचना का सामना करना पड़ेगा; और वे अपने स्वयं के स्तर से और ऊपर उठने को अधिक उत्सुक होंगे, अथवा कम से कम उन्हें इस बात की सांत्वना रहेगी कि, यदि जैसा कि संभावित है कि अनुसूचित जाति के एक बड़े हिस्से को मुस्लिम लीग से मैत्री करने से रोक सकेंगे। समिति का कार्य नागरिक अधिकारों के साथ-साथ अल्पसंख्यक वर्गों का काम देखना है, ताकि अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों से ऐसे किसी पक्षपात की आवश्यकता न रहे कि वे अल्पसंख्यक हैं अथवा नहीं। दूसरी ओर, ऐसी कोई गारंटी नहीं है कि डॉ. अम्बेडकर अथवा अनुसूचित जाति का कोई अन्य सदस्य, जो कांग्रेस का विरोध करता हो, समिति में अपना स्थान सुरक्षित कर सकेगा।
मैं अभी भी यह महसूस करता हूं कि हमें इस सार्वजनिक घोषणा के लिए डॉ. अम्बेडकर के अनुरोध के प्रति उŸार में स्वैच्छा से यह घोषणा नहीं करनी चाहिए कि मिशन के 16 मई के बयान के पैरा 20 का अभिप्राय यह है कि अनुसूचित जाति एक अल्पसंख्यक वर्ग है। ऐसा करने से काफी हद तक वास्तव में गांधी के साथ एक विवाद उठ खड़ा होगा जिसके फलस्वरूप कांग्रेस अनुसूचित जातियों को शामिल करने का एक प्रदर्शन के रूप में विरोध करेंगे। यहां तक कि यदि हम यह नहीं कहते कि अनुसूचित जाति अल्पसंख्यक है, किन्तु यह कहते हैं कि उन्हें समिति