210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में शामिल किया जाए, हमारे बयान से एंग्लो-इंडियन और अन्य समूहों के पक्ष में भी समान बयान जारी करने की मांगे उठेंगी, और इन बयानों को संविधान सभा में हस्तक्षेप के रूप में माना जाएगा, हम ऐसी स्थिति से बचने के लिए बहुत चिन्तित हैं। ऐसी कोई संभावना नहीं है कि ऐसी किसी घोषणा से प्रभावित होकर कांग्रेस सलाहकार समिति में अनुसूचित जातियों से कोई बेहतर व्यवहार करेगी, जैसा वह अन्य स्थिति में करती, न ही इससे डॉ. अम्बेडकर की कोई मदद होगी, क्योंकि यह घोषणा साधारणतया अनुसूचित जातियों से संबद्ध होगी, जिससे कांग्रेस के पक्षधरों और विरोधियों के बीच कोई अंतर स्पष्ट नहीं हो सकता।
पौथिक-लॉरेन्स
श्री एटली ने इस कार्यवृत में टिप्पणी की थीः आगे कोई कार्रवाई नहीं।
एटली पेपर्स, यूनिवर्सिटी कालेज, ऑक्सQोर्ड
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‘कराची, 14 अक्तूबर, 1946
डॉ. भीमराव अम्बेडकर, अनुसूचित जाति नेता और वायसराय की कार्यकारी परिषद् के पूर्व सदस्य हवाई मार्ग से बम्बई से लंदन जाते हुए आज कराची पहुंचे।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वह एक राजनैतिक मिशन के लिए दौरे पर हैं और वह मि. सी.आर. एटली, प्रधान मंत्री, और मि. चर्चिल से भेंट करेंगे तथा उनके साथ भारत के संवैधानिक मामलों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने अपने मिशन के बारे में और कोई बात करने अथवा किसी स्पष्टीकरण के लिए मना कर दिया-
ए.पी.आई.’’
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने निम्नलिखित ज्ञापन तैयार किया तथा पारिचालित करने के लिए उसे अपने साथ लेकर गए--------------संपादक।
केबिनेट मिशन ने अपने 10 मई के बयान में अपने अंतरिम और दीर्घावधि वाले प्रस्ताव रखे थे ताकि भारत में राजनीतिक गतिरोध को हल किया जा सके। उनके प्रस्तावों की सबसे कटु और भयभीत करने वाली विशेषता उनके द्वारा भारत के लोगों के बीच अछूतों को एक पृथक और विशिष्ट तत्व की पहचान देने से मनाही करना था। मिशन ने अछूतों को इस प्रकार पूरी तरह से अनदेखा किया था कि अपने