61. लार्ड पैथिक-लॉरेन्स द्वारा प्रधानमंत्री श्री एटली को लिखा गया पत्र - Page 231

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

से उन्होंने अछूतों को भारत में एक पृथक तथा विशिष्ट तत्व की पहचान दी और इसलिए उन्हें भारत के अन्य अल्पसंख्यक वर्गों जैसे मुस्लिमों, भारतीय ईसाइयों आदि की भांति समान रक्षोपाय पाने का पात्र बताया था।

( iii ) ब्रिटिश सरकार जून, 1945 में आयोजित शिमला सम्मेलन में इस सिद्धांत पर दृढ़ थी। उस सम्मेलन में आमंत्रित भारतीयों में, अछूतों का एक प्रतिनिधि भी था, जिसे पुनः कांग्रेस अथवा अन्य किसी राजनैतिक दल से अलग और स्वतंत्र रूप से आमंत्रित किया गया था।

( iv ) यह कहा जा सकता है कि 1942 में क्रिप्स प्रस्तावों के भाग के रूप में गठित की गई संविधान सभा में अछूतों के लिए पृथक प्रतिनिधित्व का कोई उपबंध नहीं था और इसलिए, केबिनेट मिशन के प्रस्तावों को नीति को विचलित करने वाला नहीं माना जा सकता। उŸार है कि उन्होंने ऐसा किया है। 1942 के क्रिप्स प्रस्तावों में, ऐसा नहीं था कि केवल अछूतों को ही पृथक प्रतिनिधित्व का अधिकार नहीं मिला था। वास्तविकता यह है कि संविधान सभा में किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को पृथक प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था। किन्तु केबिनेट मिशन की संविधान सभा के गठन में मुस्लिमों और सिक्खों को पृथक पहचान और पृथक प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि अछूतों के मामले में मनाही कर दी गई है। इसी पक्षपात को लेकर कि अछूतों के प्रति भेदभाव किया गया है वे शिकायत कर रहे हैं।

  1. केबिनेट मिशन के प्रस्तावों की असमानता इस तथ्य में निहित है कि वह भारत में अछूतों को एक अलग तत्व के रूप में पृथक पहचान देने की नीति से हटता है और उन्हें मुस्लिमों तथा सिक्खों के समान मान्यता न देकर उनके साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार करता है।
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  1. केबिनेट मिशन द्वारा अछूतों को एक पृथक तत्व के रूप में पहचान नहीं दिया जाना उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा और उसकी ओर से किए गए वायदों के विपरीत है। कुछ निम्नलिखित वायदों का उल्लेख आवश्यक हैः

( I ) (

)

हमें भारतीय एकता के हित में भारतीय राज्यों को किसी संवैधानिक योजना में शामिल करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को भूलना नहीं चाहिए।

मैं इनमें से केवल दो का उल्लेख करना चाहूंगा-मुस्लिम अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति---------पूर्व समय में अल्पसंख्यकों को गारंटी दी गई है;