61. लार्ड पैथिक-लॉरेन्स द्वारा प्रधानमंत्री श्री एटली को लिखा गया पत्र - Page 232

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कि उनकी स्थिति को सुरक्षा प्रदान की जाएगी और उस दी गई गारंटी का सम्मान किया जाना चाहिए। -लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा ओरिएंट क्लब, बम्बई में 10 जनवरी, 1940 को

दिए गए भाषण का उद्धरण

( ii ) )

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दो बिन्दु मुख्य रूप से उभरे हैं। इन दो बिन्दुओं पर, हिज मेजेस्टी की सरकार चाहती है कि मैं उसकी स्थिति को स्पष्ट करुं। पहला बिन्दु, भविष्य की किसी संवैधानिक स्कीम के संबंध में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर है--------

स्पष्ट है कि वे (हिज मेजेस्टी की सरकार) भारत की शांति और हित के लिए अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों को सरकार के किसी ऐसे तंत्र को सौंपने पर विचार नहीं कर सकते, जिसके प्राधिकार को प्रत्यक्ष तौर पर भारतीय जीवन में बड़े और शक्तिशाली तत्वों द्वारा नकार दिया जाए। न ही वे ऐसे तत्वों को बलपूर्वक अपने अधीन करके ऐसी सरकार में शामिल करने का कार्य ही कर सकते हैं। -लॉर्ड लिनलिथगो 8 अगस्त, 1940 को दिए गए का बयान से

उदाहरण

( iii ) (

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कांग्रेसी नेताओं------ने एक मजबूत संगठन का निर्माण किया है, जो भारत में सर्वाधिक दक्ष राजनीतिक तंत्र है--------यदि केवल वे ही सफल हुए होते। यदि कांग्रेस वास्तव में वह कहती, जैसा वह भारत की राष्ट्रीय जीवनधारा के समस्त मुख्य कारकों के प्रवक्ता के रूप में दावा करती है, तो उनकी मांगों में वृद्धि होते हुए भी कई मामलों में हमारी समस्या आज की तुलना में कहीं आसान होती। यह सत्य है कि संख्या की दृष्टि से वे ब्रिटिश भारत का एकल सबसे बड़ा दल है। पूरे किंतु भारत के बारे में बोलने के तथ्य के आलोक में उनका दावा भारत के जटिल जीवन में महत्वपूर्ण कारकों द्वारा पूरी तरह से अस्वीकार किया जाता है कि उन्हें संख्यात्मक रूप में न सिर्फ अल्पसंख्यक माना जाए बल्कि भविष्य की किसी भी भारतीय नीति में एक अलग सांविधिक कारक माना जाए। इन कारकों में सबसे पहले बहुत मुस्लिम समुदाय आता है। उन्हें भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रों में बहुमत के मत से चुनी गई संविधान सभा द्वारा बनाए गए संविधान से कुछ लेना-देना नहीं है। वे इस अधिकार का दावा करते हैं कि किसी भी सांविधानिक विचार-विमर्श के समय उन्हें