215
अनशन की धमकी दी कि यदि अछूतों को दी गई पृथक मान्यता वापस नहीं ली गई। केबिनेट मिशन अपने प्रस्तावों को सफल बनवाने को उत्सुक था। जब तक वे गांधी जी की सहमति न प्राप्त करते यह संभव नहीं था। गांधी जी ने अपनी मांग रखी और मिशन ने उसे मान लिया। वह मांग थी अछूतों की पृथक राजनैतिक प्रभुता की कुर्बानी। वस्तुतः कोई भी कह सकता है कि जहां तक अल्पसंख्यकों का संबंध है, केबिनेट मिशन के प्रस्तावों में कुछ नया नहीं था, बल्कि गांधी के फार्मूले की पुनरावृŸा थी जो उन्होंने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में सुझाए थे। गांधी जी ने कहा कि राजनैतिक प्रयोजनों से वे केवल तीन समुदायों को मान्यता देते हैं (1) हिन्दू, (2) मुस्लिम और (3) सिक्ख। मिशन का फार्मूला गांधी जी के फार्मूले की प्रतिलिपि मात्र है। इस संबंध में अन्य कोई स्पष्टीकरण नहीं है।
III
| v | iu | s f | u | .kZ; | ksa d | s v | kSfp | R; | e | sa d | s | fc | u | sV | fe | ' | ku | }k | jk f | y | ; | s x | ; | s v | kèkk |
|---|
- अछूतों को एक पृथक तत्व के रूप में मान्यता नहीं दिए जाने के अपने निर्णय के औचित्य के लिए केबिनेट मिशन ने फरवरी, 1948 में हुए प्रान्तीय विधान सभाओं के चुनावों के परिणामों को आधार बनाया। 18 जुलाई, 1946 को केबिनेट मिशन के प्रस्तावों पर संसद में हुई बहस के दौरान, मिशन के सदस्यों ने निम्नलिखित बिन्दु
खोजने का प्रयास कियाः-
( i ) कि, चुनावों में, कांग्रेस ने अनुसूचित जातियों के लिए सभी आरक्षित सीटों
पर कब्जा कर लिया; फलस्वरुप कांग्रेस अछूतों का प्रतिनिधित्व करती है।
ऐसी स्थिति में अछूतों को पृथक प्रतिनिधित्व दिए जाने का कोई औचित्य
नहीं है।
( ii ) कि, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ और मेरी अपनी पहचान केवल
बम्बई और मध्य प्रातों तक सीमित रह गई थी।
| v | kèkk | jksa d | Col4 | h | fu | jF | kZd | r |
|---|
- ये आधार अद्भुत रूप से गढ़े गए हैं और एक सत्यनिष्ठ छानबीन की तुलना में टिकते नहीं हैं। केबिनेट मिशन ने आरंभ में ही भारी गलती कर दी कि उन्होंने कांग्रेस के प्रतिनिधि रूप के आकलन के लिए चुनावों के परिणामों को आधार बनाया। इस काम में, मिशन निम्नलिखित परिस्थितियों का ध्यान रखने में असफल रहाः-
( i ) हिन्दू निर्वाचन क्षेत्र पूरी तरह से युद्ध की उŸोजना में ब्रिटिश-विरोधी बना