218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिक उम्मीदवार खड़े करने चाहिए थे और 151 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्येक में
प्रारंभिक चुनाव लड़ना चाहिए था तथा प्रत्येक अन्य पार्टी का अंतिम चुनाव में
आने का अधिकार छीन लेना चाहिए था। कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया। दूसरी
ओर, 43 सीटों पर हुए प्रारंभिक चुनावों में भी, कांग्रेस ने अपनी विजय के
कम अवसरों को देखते हुए प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में अपना केवल एक-एक
उम्मीदवार ही खड़ा किया, और प्रथम 4 में स्थान नहीं पाने पर अंतिम चुनाव
में सवर्ण हिन्दुओं के मतों के सहारे जीतने की सोची। इससे प्रतीत होता है
कि कांग्रेस जानती थी कि अछूतों को कांग्रेस पर विश्वास नहीं था।
( iii ) अछूतां को मत देने का अधिकार सर्वप्रथम 1937 में प्राप्त हुआ था। 1937 में
ही अछूतों ने चुनाव लड़ने के लिए अपने को संगठित करना आरंभ किया।
केवल इस तथ्य से कि चुनावों में कांग्रेस ने अनुसूचित जाति संघ को पराजित
कर दिया था, यह निष्कर्ष निकालना गलत है कि अछूत कांग्रेस के साथ
हैं। केबिनेट मिशन चुनाव लड़ने में कांग्रेस और अनुसूचित जाति संघ की
असमान शक्ति को योग्य ठहराकर यह निष्कर्ष निकालकर छूट लेना चाहता
है कि चुनावों के परिणामों से संघ पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
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- केबिनेट मिशन के सदस्यों ने बहस की कि डॉ. अम्बेडकर की प्रसिद्धि केवल बम्बई प्रेसिडेंसी और मध्य प्रांतों की अनुसूचित जातियों तक ही सीमित है। इस बयान को कोई आधार नहीं है। अनुसूचित जाति संघ अन्य प्रान्तों में भी अपना कार्य उसी प्रकार कर रहा है और उसने बम्बई तथा मध्य प्रांतों की भांति अन्य स्थानों पर भी उल्लेखनीय चुनावी सफलताएं हासिल की हैं। यह बयान देते हुए मिशन डॉ. अम्बेडकर द्वारा संविधान सभा के चुनाव में उनकी अकेली विजय को ध्यान में रखने में असफल रहा। वह बंगाल प्रान्तीय विधान सभा के उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए। उन्होंने प्राथमिक पसंद वाले 7 मत अपने हक में प्राप्त किए और चुनाव में, जहां तक सामान्य सीटों का संबंध था, सर्वाधिक मत प्राप्त किए, यहां तक कि उन्होंने कांग्रेस दल के नेता श्री शरत चन्द्र बोस को भी पराजित कर दिया था। यदि बम्बई और मध्य प्रांतों के बाहर डॉ. अम्बेडकर का प्रभाव नहीं है, तो वे बंगाल से कैसे चुने गए? यह भी याद रखा जाए कि बंगाल प्रान्तीय विधान सभा की 30 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इन 30 में से कुछ मिलाकर 28 सदस्य कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे। 2 सदस्य इनके दल के थे, जिनमें से एक चुनाव के दिन बीमार पड़