220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उसी तरह अपना वर्चस्व कायम रखेंगे जैसा वे संविधान सभा में रखते हैं;
( ii ) यह तथ्य कि संविधान सभा के साथ-साथ सलाहकार समिति में भी कांग्रेस
की छवि के कारण कुछ अछूत शामिल होंगे, संविधान सभा और समिति के
अछूत सदस्य, जो हिन्दुओं के हाथ की कठपुतली हैं, अछूतों की कुछ मदद
नहीं कर सकते।
( iii ) सलाहकार समिति द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के प्रश्नों को लेकर किए जाने
वाले निर्णय बहुमत पर छोड़ दिए गए हैं, जिसका अर्थ है कि निर्णय जातीय
हिन्दुओं द्वारा किया जाएगा और उसे अल्पसंख्यको पर लागू किया जाएगा।
( iv ) सलाहकार समिति का निर्णय भले ही पक्ष में हो, सिफारिशों से अधिक कुछ
नहीं है। वे संविधान सभा के लिए बाध्यकारी नहीं हैं।
सलाहकार समिति का हथियार छल-कपट न भी हो तो भी कृत्रिम जरूर होता है और हिन्दू बहुमत अल्पसंख्यकों के प्रति जो गलत कार्य कर सकता है, उससे बचने के लिए उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। अपने कपटपूर्ण व्यवहार के चलते हिन्दू बहुमत ने अछूतों को दर किनार कर दिया है और लगता है कि वे उन्हें राजनीतिक सुरक्षा प्राप्त करने के उनके दावे, जो किसी बहुमत वाले वर्ग को देय होते हैं, से वंचित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह कांग्रेस के 25 जून, 1946 के पत्र (कमी.6861 में मद 21) से स्पष्ट है। उक्त पत्र में कांग्रेस ने यह मत अपनाया है कि अछूत अल्पसंख्यक नहीं हैं। यह एक आश्चर्यचकित करने वाली स्थिति है। गांधी जी द्वारा भी अपने 21 अक्तूबर, 1939 के हरिजन नामक साप्ताहिक पत्र में यह माना गया है कि भारत में केवल अछूत ही सच्चे अल्पसंख्यक हैं। अतः कांग्रेस ने इसका ठीक उलट पक्ष किया है। कांग्रेस ने जो कदम उठाया है, वह भारत शासन अधिनियम, 1935 के निहित सिद्धांतों के विपरीत है, जबकि अधिनियम में अछूतों को अल्पसंख्यक कहा गया है। इस उलट पक्ष में क्या कपट है, उसे जानना संभव नहीं है। यदि कांग्रेस अछूतों को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं देती, तो यह संभव है कि संविधान सभा उन्हें वह सुरक्षा प्रदान करने से मना कर दे, जो वह अन्य अल्पसंख्यक वर्गों को देने के लिए सहमत हो सकती है। अतः सलाहकार समिति अछूतों को इस संकट से नहीं बचा सकती।
अतः, यह सुनिश्चित करने के लिए कि अछूतों की स्थिति दांव पर न लगे, संसद को अवश्य ही हस्तक्षेप करना चाहिए। संसद को ऐसा अवश्य करना चाहिए, केवल इसलिए नहीं कि इसने वायदा किया है किन्तु इसलिए कि संविधान सभा की वार्ताओं की अभिपुष्टि नहीं होती।
संसद क्या कर सकती है? अछूत चाहेंगे कि अंतरिम सरकार के मामले में उनके साथ जो कुछ गलत हुआ है उसे ठीक किया जाए। वे अपना कोटा निर्धारित