222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘जबकि संविधान सभा अपना काम पूरा कर चुकी है, हिज मेजेस्टी की सरकार संसद को केवल उन दो मुद्दों को छोड़कर भारतीय जनता को संप्रभुता सौंपे जाने के लिए आवश्यक समझी जाने वाली कार्रवाई की सिफारिश करेगी, जिनका बयान में उल्लेख है और हमारा विश्वास है कि जो विवादास्पद नहीं हैं, मुद्दे हैंः अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपबंध (बयान का पैरा 20)
और सŸा के हस्तातंरण (बयान का पैरा 22) के फलस्वरूप सामने आए मुद्दों के लिए हिज मेजेस्टी की सरकार से संघि करने की इच्छा’’।
इस पैराग्राफ के पीछे जो विचार है, वह पूर्णतया स्पष्ट नहीं है। हिज मेजेस्टी की सरकार के आशय के स्पष्टीकरण के लिए उन पर दबाव बनाना आवश्यक है।
(ख) यदि अध्यधीन शब्द का अभिप्राय यह है कि हिज मेजेस्टी की सरकार ने संविधान सभा द्वारा अल्पसंख्यकों के प्रदन्त सुरक्षा की जांच के अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है, ताकि वह देख सके कि प्रदŸा सुरक्षा पर्याप्त और वास्तविक हैं, अतः हिज मेजेस्टी की सरकार पर यह दबाव बनाना आवश्यक है कि वह इस प्रकार की जांच के लिए किस तन्त्र का प्रस्ताव करती है। इसके लिए संयुक्त संसदीय समिति का ऐसा तंत्र सर्वाधिक उपयुक्त होगा, जिसे अल्पसंख्यक वर्गों के गवाहों के बयान लेने की शक्ति प्राप्त हो। इसका एक उदाहरण है। जब भारत शासन अधिनियम, 1935 अपनी रचना की अवस्था में था, उस समय एक संयुक्त संसदीय समिति गठित की गई थी। संविधान सभा की रिपोर्ट के अनुपालन में उक्त उदाहरण का अनुकरण करना गलत नहीं होगा।
III. हिज मेजेस्टी की सरकार पर यह घोषणा करने के लिए दबाव बनाया जाए कि संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान, जिसमें भारत के भावी संविधान में थोड़े बहुमत द्वारा अल्पसंख्यकों को प्रदन्त सुरक्षा की शक्ति समाप्त किए जाने की शर्त है, के संबंध में क्या वह इसके लिए आग्रह कर सकेगी।
(क) न तो केबिनेट मिशन का 16 मई, 1946 का पहला बयान, न ही उसका 25 मई, 1946 का अनुपूरक बयान स्वतंत्र भारत के संविधान में संशोधन और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा संबंधी उपबंध को रद्द किए जाने के प्रश्न से संबंधित है। संसद में रक्षोपाय पुनः स्थापित करने का कोई अर्थ नहीं है यदि इन रक्षोपायों को भारतीय विधानमंडल द्वारा समाप्त किया जा सकता हो। ऐसी कार्रवाई के लिए केवल यही उपाय हैं कि यह ध्यान रखा जाए कि संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान में भारतीय विधायिका की संवैधानिक शक्तियों को सीमित करने की शर्त रखी जाए और अल्पसंख्यकों