238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(च) समय-समय पर स्टाफ या अन्य कार्यकर्ताओं को नियुक्त करना और उनके
वेतन तथा रोजगार की शर्तें तय करना तथा जब आवश्यक हो उन्हें निलंबित
या बर्खास्त करना।
(छ) सभा की विभिन्न गतिविधियों का विनियमन करने की उपनियमों की विरचना
परिवर्तन और संशोधन करना और उसका संचालन और प्रबंध करना और
इस प्रकार विरचित उप-नियमों को लागू रखेगी जब तक कि उन्हें नियंत्रण
बोर्ड द्वारा संशोधित या रद्द नहीं कर दिया जाता।
(ज) परिषद् का सदस्य, यदि परिषद् की चार बैठकों में लगातार उपस्थित रहने
में असफल रहता है, तो उसके स्थान पर रिक्ति की घोषणा करना।
(झ) सभी अभिदाताओं की नियमित सूची का रख-रखाव करना।
(ञ) सभा के सदस्यों की साधारण सभा और न्यासी बोर्ड और नियंत्रण
बोर्ड की बैठकों को बुलाना और उनकी व्यवस्था करना।
परिषद् अपनी प्रथम बैठक में अपने सदस्यों में से एक सभापति, एक प्रधान सचिव और एक कोषाध्यक्ष को निर्वाचित करेगी। इनके अलावा परिषद् विशिष्ट कार्यों और गतिविधियों के प्रभारी के रूप में, अपने सदस्यों के बीच में से एक या अधिक सहायक सचिवों या आयोजन सचिवों को निर्वाचित कर सकती है। वर्ष के दौरान इन पदाधिकारियों के पद पर होने वाली रिक्तियां अगली साधारण मासिक बैठक में परिषद् के शेष सदस्यों द्वारा संकल्प द्वारा भरी जा सकती है जिसे इस प्रयोजन के लिए बुलाई गई बैठक में सम्यक रूप से पारित किया जाए।
सभापति, प्रधान सचिव और कोषाध्यक्ष सभा से संबंधित धन को उचित रूप से जमा करने और निकालने के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेवार होंगे। वे परिषद् द्वारा नियुक्त बैंक या बैंकों में सभा के न्यासियों के नाम में धन जमा करेंगे।
धन निकालने का सभी कार्य बजट के अनुरुप किया जाएगा जिसका संचालन सभापति, प्रधान सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों के अधीन होगा।
परिषद् की बैठकें साधारण या विशेष होंगी।
सभा के धन की सभी प्राप्तियां और उसकी निकासियों को परिषद् की अगली साधारण मासिक बैठक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।