244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय दलित वर्ग संस्थान
डॉ.बी.आर.अम्बेडकर ने सन् 1930 में प्रथम गोल मेज सम्मेलन, लंदन में भाग लिया था। अपने प्रवास के दौरान, अछूतों के उत्थान के लिए भारतीय रियासतों के प्रमुखों से विŸाय सहायता प्राप्त करने के लिए दलित वर्ग संस्थान की ओर से अपील तैयार की थी। उनके प्रयत्न स्वरूप उन्हें विŸाय सहायता प्राप्त हो गई। उन्होंने यह कार्य जोरदार तरीके से किया। इसी प्रकार दूसरे गोल मेज सम्मेलन के समय पर उन्होंने नवम्बर, 1931 में अपील तैयार कर उसे वितरित किया।
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संगठन
दलित वर्ग संस्थान दलित वर्गों का संगठन है जिसका संचालन दलित वर्गों के सदस्यों द्वारा दलित वर्गों के हितों के लिए किया जाता है। संस्थान का लक्ष्य, दलित वर्गों को उनकी वर्तमान पद दलित स्थितियों से उठाकर भारतीय समाज में सामाजिक और राजनीतिक समता की स्थिति तक लाकर उनके आर्थिक कल्याण का संवर्धन करना है।
संस्थान की स्थापना जून, 1925 में हुई थी और तब से ही यह कार्य कर रहा है। संस्थान को अखिल भारतीय संगठन बनाने का इरादा है जिसकी शाखाएं पूरे भारत में होंगी। लेकिन संसाधनों के अभाव में संस्थान की गतिविधियां बंबई प्रेसीडेन्सी तक सीमित हैं। संस्थान उन सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से कार्य कर रहा है जिन्होंने दलित वर्गों के उत्थान का बीड़ा उठा रखा है। वे मुख्य रूप से दलित वर्गों के हैं और बंबई प्रेसीडेन्सी के विभिन्न जिलों में फैले हुए हैं। इन सामाजिक कार्यकर्ताओ के क्रियाकलापों का निर्देशन और समन्वय, बंबई शहर में स्थित संस्थान के मुख्यालय में दलित वर्गों के प्रमुख सदस्यों की प्रबंध परिषद् द्वारा किया जाता है। संस्थान के क्रियाकलाप
संस्थान की स्थापना के पांच साल बीत गए हैं इस अल्प अवधि के दौरान संस्थान का कार्य इतना फैल गया है कि इस पर्चे में इसके कार्य का सारांश देना भी संभव नहीं है। यहां केवल संस्थान द्वारा शुरू किए गए उन क्रियाकलापों की रूपरेखा का संकेत भर किया जा सकता है जो उसके अपने लक्ष्य, यथा दलित वर्गों के उत्थान के अनुपालन में किया है। ये क्रियाकलाप निम्न शीर्षों के अंतर्गत वर्गीकृत किए जा सकते हैंः