246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चला रहा है और इस संबंध में संस्थान न्यायालय में परीक्षण मामला दाखिल
करके इस प्रश्न को हमेशा के लिए समाप्त करने की भी सोच रहा है।
विभागों द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों के फलस्वरूप होती हैं। यह ध्यान
में रखना चाहिए कि भारत में लोक सेवा में भारी संख्या में उच्च जाति के हिंदू
कार्यरत हैं। उनका दलित वर्गों के प्रति विरोध कुख्यात है और ऐसे मामले
बहुत हैं जिनमें प्रशासनिक और यहां तक कि न्यायिक अधिकारियों ने अपनी
शक्तियों का दुरुपयोग करके उच्च जाति के हिंदुओं का पक्ष लिया है। संस्थान
ने इस विषय पर विशेष ध्यान दिया है और इसके लिए विशेष कार्यालय स्थापित
किया है जो सरकारी विभाग के अनुचित आदेशों के फलस्वरूप दलित वर्गों
के अपमानित सदस्यों की ओर से सरकार को अभ्यावेदन देगा। संस्थान ने
बहुत से ऐसे मामलों की जिम्मेवारी उठाई है जहां उच्चतर न्यायिक प्राधिकरण
को अपील करने का भार था या उन मामलों में निजी पक्ष की सहायता की
है, जो दलित वर्गों के लिए सामान्य महत्व के और उनके साधनों के परे थे,
ताकि वे निम्न न्यायालयों द्वारा उन के विरुद्ध किए गए गलत कार्यों के संबंध
में अपील कर सकें।
(4) कल्याण कार्यः दलित वर्गों की कमजोरियों में से एक उनकी गरीबी है। उनकी कल्याण कार्यः
90 प्रतिशत गरीबी वास्तव में अस्पृश्यता के कारण है जिसके फलस्वरूप उनके
लिए जीवन के सभी व्यवसाय बंद है। संस्थान प्रारंभ से ही दलित वर्गों की
आर्थिक स्थिति में सुधार करने के अनवरत प्रयत्न कर रहा है। इस संबंध में
संस्थान को राज्य के विभागों में दलित वर्गों की भर्ती को सुरक्षित करने में
बहुत संघर्ष करना पड़ा था।
संस्थान के प्रयत्न बहुत सफल रहे हैं। न केवल दलित वर्गों के लिए विभिन्न विभागों में बहुत संख्या में भर्ती सुनिश्चित की जा सकी बल्कि उन्हें उन विभागों में भी प्रवेश मिल सका जो पहले अस्पृश्यता के कारण उनके लिए बंद थे। इस प्रसंग में पुलिस विभाग में भर्ती का उल्लेख किया जा सकता है। दूसरा साधन जिसके द्वारा संस्थान ने दलित वर्गों की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की सोची वह था उनके लिए भूमि सुनिश्चित करना ताकि वे स्वतंत्र किसान की भांति काम कर सकें। बंबई प्रेसीडेन्सी में बहुत से भाग हैं जहां बंजर भूमि है। सरकार इस बंजर भूमि को पट्टे पर किसी को भी खेती करने के लिए भाड़े पर देती है। संस्थान के प्रारंभ होने से पूर्व सरकार की यह सारी बंजर भूमि हिंदू जाति के किसानों को दी जाती थी।