252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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दल के लक्ष्य
दल के कार्यक्रम स्पष्ट करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि जहां तक नए संविधान का प्रश्न यह परिपक्व विचार-विमर्श और उन सबके परामर्श से तैयार किया गया है जो इसमें रूचि रखते थे।
‘‘दल यह मानता है कि नया संविधान त्रुटिपूर्ण है और पूर्ण जिम्मेदार सरकार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। दल प्रांतीय संविधान की अनेक विशेषताओं पर आपिŸा करता है, विशेष रूप से दूसरे सदन की संस्था से फिर भी, दल संविधान चलाने के लिए तैयार होते हुए भी, दल संविधान चलाने में विश्वास करता है। लेकिन संविधान चलाने के लिए तैयार होते हुए भी, दल इस बात के लिए प्रयास करेगा कि राज्यपाल में निहित विशेष आपातकालीन और आरक्षित शक्तियों को इस ढंग से प्रयोग में नहीं लाया जाए जो पूर्णरूप से जिम्मेवार सरकार की पद्धति को रद्द कर दें।’’
जहां तक आर्थिक प्रश्न का संबंध हैः
(1) ‘‘दल भूमि बंधक बैंक, कृषक उत्पादक, सहकारी समितियां और विपणन समितियां स्थापित करने का जिम्मा लेगा ताकि कृषि उत्पादकता में सुधार किया जा सके।
(2) दल ऐसा सोचता है कि जोत विखंडन जो कि दल की राय में, कृषि में पूंजी और खेती की उन्नत पद्धतियों का उपयोग करने में भारी रुकावटें हैं, इसलिए यह कृषकों की गरीबी का मूल कारण है।
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तथापि दल यह मानता है कि जोत विखंडन और कृषकों की परिणामी गरीबी भूमि पर जनसंख्या के दबाव के कारण हैं और जब तक भूमि पर जीवन-निर्वाह करने वाली अतिरिक्त जनसंख्या को कम करके दबाव कम नहीं किया जाता विखंडन जारी रहेगा और कृषकों की स्थिति आज की ही भांति अभावग्रस्त बनी रहेगी। दल की राय में कृषकों की सहायता करने तथा कृषि को अधिक उत्पादन बनाने का मुख्य साधन प्रांत का औद्योयोगिकीकरण है। इसलिए दल पुराने उद्योगों को पुनःस्थापित करने की कोशिश करेगा और ऐसी नई इकाइयों का संवर्धन करेगा जैसाकि प्रांतों के प्राकृतिक संसाधन अनुमति देंगे।
(3) लोगों की दक्षता और उत्पादक क्षमता बढ़ाने के लिए दल तकनीकी शिक्षा
का गहन कार्यक्रम प्रारंभ करने की कोशिश करेगा।