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(4) दल, उद्योगों के राज्य प्रबंधन और राज्य स्वामित्व के सिद्धांत को स्वीकारता
है जब कभी यह लोगों के हित में आवश्यक हो।
(5) दल, मुक्त और पूर्ण जीवन के सामने आने वाली सभी रुकावटों को दूर करने
की कोशिश करेगा और ऐसी किसी आर्थिक पद्धति को परिवर्तित, संशोधित या
समाप्त करेगा जोकि किसी वर्ग या वर्ग के व्यक्तियों के लिए अनुचित है।
(6) दल, सामान्य रूप से कृषि काश्तकारों को और विशेष रूप से (क) कोठी
पद्धति और (ख) तालुकदारी पद्धति के अंतर्गत काश्तकारों को भू-स्वामियों द्वारा
आहरण और बेदखली से संरक्षण प्रदान करने के लिए कानून बनाएगा।
(7) दल, कृषक मजदूरों के साथ-साथ औद्योगिक मजदूरों को सभ्य जीवन के
अनुरूप न्यूनतम जीवन-स्तर प्रदान करने की कोशिश करेगा।
(8) दल, औद्योगिक मजदूरों के हितलाभ के लिए फैक्टरियों में रोजगार, बर्खास्तगी
और पदोन्नति, काम करने के अधिकतम घंटे, उचित मजदूरी की अदायगी,
सवेतन छुट्टी और अन्य संभव जीवन की सुविधाओं, सक्रिय सेवा से निवृŸा,
वृद्धावस्था या अन्य अक्षमता के कारण पेन्शन और बोनस आदि की अदायगी
के नियंत्रण संबंधित कानून निर्माण की कोशिश करेगा। दल मजदूरों को
बीमारी, बेरोजगारी और दुर्घटना के लिए सामाजिक बीमा योजना भी शुरू
करने की कोशिश करेगा। दल, मजदूरों को सस्ते और स्वच्छ आवास प्रदान
कराने का भी प्रयत्न करेगा।
(9) कृषक मजदूरों के हितलाभों के लिए दल वही हितलाभ प्रदान करने की
कोशिश करेगा जो, परिस्थितियों के अनुरूप आशोधनों के साथ, औद्योगिक
मजदूरों के लिए प्रस्तावित हैं।
(10) दल, इस सिद्धांत को स्वीकारता है कि बेरोजगारी कम करना राज्य का
दायित्व है और इसलिए दल इस दायित्व का निर्वाह बेरोजगारों और भूमिहीन
मजदूरों के लिए भू-व्यवस्था की योजनाओं को शुरू करके और लोक निर्माण
के कार्यों को प्रारंभ करके करेगा।
(11) दल ग्रामीण ऋणी वर्ग को साहूकारों के ज्यादा पैसा वसूलने, सूदखोरी और
कपटपूर्ण लेन-देनों से संरक्षित करने के लिए कानून निर्माण करेगा।
(12) दल, बड़े शहरों और नगरों के औद्योगिक केंद्रों में, मकान किरायों के मामलों
में, निम्न मध्यवर्ग को उचित संरक्षण प्रदान करने के लिए कानून बनाएगा।