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254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय कराधान समस्याएं

कराधान के मामले में दल का विचार यह है कि दल यह मानता है कि लोगों के कल्याण में सुधार के लिए प्रत्येक सरकार को राष्ट्र-निर्माण की गतिविधियां शुरू करनी चाहिए और इन गतिविधियों को तभी प्रारंभ किया जा सकता है जब सरकारी

खजाने में धन हो। यह धन लोगों पर कर लगाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। एक समृद्ध सरकार ही अच्छी सरकार की सबसे बड़ी गारन्टी है।

दल का मानना है कि सिद्धांत के रूप में कराधान में कटौती का प्रचार करना और लोगों को यह बताना कि उपयोगी राष्ट्र-निर्माण की गतिविधियों को त्यागकर कराधान में कटौती उनके हित में है, गरीब वर्गों को धोखा देना और गुमराह करना है। इसका यह तात्पर्य नहीं है कि दल कराधान की पद्धति को ज्यों-का-त्यों रखना चाहता है। इसके विपरीत दल वर्तमान कराधान-पद्धति का कड़ा विरोध करता है। दल निश्चित रूप से यह मानता है कि वर्तमान कराधान पद्धति अनुचित है और गरीब लोगों पर अत्यधिक भार डालती है। दल कराधान की सामान्य पद्धति में इस असमता को सुधारना चाहता है। दल भू-राजस्व उगाहने की वर्तमान पद्धति का कड़ा विरोध करता है और इसे और अधिक साम्यपूर्ण और अधिक लोचदार बनाने के लिए कानून बनाने की कोशिश करेगा।

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सामाजिक सुधार

सामाजिक सुधारों के संबंध मेंः

(1) दल समस्त आवश्यक सामाजिक सुधारों के उन्नयन के लिए विधि-निर्माण

करेगी जिससे (i) रुढि़वादियों द्वारा सामाजिक सुधारकों के जाति-बहिष्कार

को रोका जा सके, और ( ii ) आतंकवाद और बहिष्कार जैसी प्रत्यक्ष कार्रवाई

द्वारा उन संगठित प्रयासों को दंडित करना जो व्यक्तियों या वर्गों को कानून

द्वारा प्रदान किए गए अधिकारों या स्वतंत्रता को प्रयोग करने से रोकते हैं।

(2) दल समस्त लोक खैरातों प्रशासन के विनियमन के लिए कानून निर्माण करना

शुरू करेगा ताकि खैराती निधियों का कुप्रबंधन और दुरुपयोग रोका जा

सके और इस प्रकार बची अतिरिक्त निधियों का उपयोग शिक्षा आदि जैसे

धर्मनिरपेक्ष प्रयोजनों के लिए सुरक्षित किया जा सके।

(3) दल भिखारियों और निराश्रितों की समस्या को सुलझाने के लिए कानून

बनाएगा।