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- जैसा इसमें अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय सोसाइटी की सभी संपिŸायां और निधियां न्यासी मंडल में विहित होंगी।
(क) सोसाइटी की संपिŸायों और निधियों के बारे में न्यासी मंडल को सोसाइटी की ओर से वाद लाने और वाद लाए जाने के लिए अधिकार होंगे।
- (1) सोसाइटी की समस्त संस्थाओं के कार्य का पर्यवेक्षण और समन्वय करने के लिए महापरिषद् होगी। महापरिषद् में पंद्रह सदस्यों से कम नहीं होंगे जिनका नामांकन शासी निकाय करेगा। इन 15 सदस्यों में से 11 सदस्य शासी निकाय में से होंगे जिनमें से 8 वे बौद्ध होंगे जो शासी निकाय के सदस्य होंगे जो अनुसूचित जातियों के सदस्यों में से परिवर्तित हुए हैं। शेष अभिदाताओं और संरक्षकों में से होंगे।
(2) शासी निकाय द्वारा जब तक अन्यथा उपबंधित न हो प्रत्येक संस्था का प्रमुख महापरिषद् का पदेन सदस्य होगा।
(3) महासभा के संकल्प केवल सिफारिश होंगे।
सोसाइटी के प्रत्येक कालेज, विहार, स्कूल या संस्था या उसके समूह के लिए जैसा शासी निकाय निर्णय करे, एक कार्यकारिणी होगी। कार्यकारिणी में कम-से-कम पांच और अधिक-से-अधिक सात सदस्य होंगे जिनकी नियुक्ति शासी निकाय करेगा। इनमें से एक कालेज या स्कूल या संस्था का संकायाध्यक्ष (डीन) या प्रिंसिपल, संस्था का रजिस्ट्रार, कम-से-कम दो बौद्ध में से जो अनुसूचित जातियों से परिवर्तित हैं और एक वह होगा जो शासी निकाय की राय में शिक्षाविद् हो।
शासी निकाय का सभापति, जो बौद्ध होगा, वह न्यासी मंडल, महा मूलतः प्रबंधक परिषद् और सभी कार्यकारिणीयों का पदेन सदस्य और सभापति होगा। इन निकायों में सदस्य उपर्युक्त खंडों में विनिर्दिष्ट सदस्यों की संख्या के अलावा होगा।
(क) (1) सोसाइटी का कार्यपालक प्राधिकार सभापति में निहित होगा।
(2) सोसाइटी की ओर से निष्पादित किए जाने वाले सभी विलेख, प्रलेख और आश्वासन अकेले सभापति द्वारा निष्पादित किए जाएं जो कि सोसाइटी पर बाध्य होंगे।
- सोसाइटी, इसकी संस्थाओं, इसकी संपिŸायों ओर इसकी निधियों का सर्वोच्च नियंत्रण और शासन शासी निकाय में विहित होगा।