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सकती है बशर्ते कि शासी निकाय की प्रयोजन के लिए विशेष रूप से बुलाई गई बैठक में उपस्थित तीन-चौथाई सदस्य उसे हटाने के पक्ष में हों।
शासी निकाय का वर्तमान सभापति अपना उŸाराधिकारी नियुक्त या नामांकित करेगा।
ऐसी दशा में जबकि वर्तमान सभापति के उŸाराधिकारी का कोई वैध नामांकन नहीं है, या किसी भी कारणवश नामांकित व्यक्ति इंकार करे या स्वीकार करने में असफल हो या पद पर न रहे, तो शासी निकाय के शेष सदस्यों द्वारा सभापति निर्वाचित किया जाएगा।
इसमें दिए गए उपबंधों के अध्यधीन शासी निकाय, न्यासी मंडल, महा (मूलतः प्रबंध) परिषद् या कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों के कार्यालय में सभी रिक्तियां शासी निकाय द्वारा भरी जाएंगी, बशर्ते कि अनुसूचित जाति से परिवर्तित बौद्ध व्यक्ति की रिक्ति केवल अनुसूचित जातियों से परिवर्तित बौद्ध व्यक्ति से ही भरी जाएगी अन्य किसी और से नहीं।
शासी निकाय का सभापति शासी निकाय का कार्यपालक अधिकारी होगा और सामान्य नीति और विŸाय मामलों में शासी निकाय के सदस्यों के परामर्श से कार्य करेगा।
( i ) सभापति शासी निकाय निकाय के सदस्य को अपनी अनुपस्थिति
में कार्य करने के लिए उप सभापति के रूप में नियुक्त कर सकता है
और उसे ऐसे प्राधिकार प्रत्यायोजित कर सकता है जिनका वह चयन
करे।
( ii ) सभापति किसी व्यक्ति को सोसाइटी के सचिव के रूप में कार्य करने
के लिए भी नियुक्त कर सकता है और लिखित रूप में उसके कार्य,
उसका वेतन और उसके कार्यालय की अवधि निर्धारित कर सकता
है।
( iii ) शासी निकाय अपने बीच में से एक व्यक्ति को सोसाइटी का प्रधान
सचिव भी नियुक्त कर सकता है। उसकी पदावधि तीन वर्ष की
होगी।
- शासी निकाय अपना कार्य करने और अपनी संस्थाओं को चलाने के