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आधी संख्या की आवश्यकता होगी।
(क) शासी निकाय या सोसाइटी की संस्था की समिति का प्रत्येक सदस्य शासी निकाय या समिति की बैठक में, जैसी भी स्थिति हो, नियमित रूप से भाग लेंगे और इस प्रकार की बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ होने की स्थिति में वह बैठक में अनुपस्थित होने के लिए लिखित रूप में अनुमति का निवेदन करेगा।
किसी बैठक के लिए निर्धारित समय के आधे घंटे के भीतर यदि कोरम के लिए सदस्य एकत्र नहीं हो पाते हैं तो उपस्थित सदस्य या सदस्यों को बैठक छोड़ने का अधिकार है। इस संबंध में संकल्प अपनाकर सभापति बैठक को स्थगित कर सकता है। यदि ऐसी स्थगित बैठक में कोरम उपस्थित नहीं है तो उपस्थित सदस्य ही कोरम होंगे।
शासी निकाय का सभापति इन निकायों की बैठकों की अध्यक्षता करेगा। प्रत्येक निकाय अप्रैल माह में अपनी पहली बैठक में वर्ष भर के लिए उप-सभापति निर्वाचित करेगा जो सभापति की अनुपस्थिति में अध्यक्षता करेगा। जब सभापति और उप-सभापति दोनों अनुपस्थित होंगे तो सदस्य अपने बीच में से बैठक के लिए सभापति निर्वाचित करेंगे।
जब तक कि अन्यथा ज्ञापन में उपबंधित न हो, प्रत्येक मामला उपस्थित सदस्यों के बहुमत से और मतदान से निर्धारित किया जाएगा। सभापति का एक निर्णायक मत होगा चाहे उसी मामले में उसने पहले मत किया हो या न किया हो, लेकिन कोई सदस्य एक से अधिक मत नहीं देगा।
शासी निकाय, महा परिषद् या कार्यकारिणी द्वारा पारित कोई संबंधित निकाय की किसी अन्य बैठक में समय-समय पर रद्द या परिवर्तित किया जा सकता है।
शासी निकाय, किसी भी बैठक में, जांच करने या कार्य करने के लिए किसी व्यक्ति या समिति नियुक्त कर सकता है, लेकिन व्यक्ति या समिति द्वारा किए गए प्रत्येक कृत्य और कार्यवाही को शासी निकाय को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, और शासी निकाय के बिना अनुमोदन के यह सोसाइटी के लिए बाध्यकारी नहीं होगी।
प्रत्येक निकाय कार्य-वृŸा का रिकार्ड सदस्य के कार्यालय में रखेगा और निकायों की बैठकों की कार्रवाई को कार्य-वृŸा पुस्तिका में दर्ज किया जाएगा और बैठक के सभापति द्वारा यह बैठक के समापन पर या किसी भावी समय पर, जब इन की पुष्टि हो जाएगी, हस्ताक्षरित किया जाएगा।