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आर. अम्बेडकर एम.ए., पीएच.डी, डी.एससी.,
बार-एट-लॉ, सदस्य, गवर्नर जनरल्स
एक्जीक्यूटिव काउंसिल
द्वारा अपील
नवीनतम जनगणना रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि सामान्यतः अछूतों के नाम से जाने जाने वाली अनुसूचित जातियों के लोगों की संख्या लगभग 50 मिलियन है। ये सुविख्यात तथ्य है कि वर्तमान में अनुसूचित जातियों की शिक्षा समूचे भारत में बहुत पिछड़ी स्थिति में है और जहां तक उच्च शिक्षा का प्रश्न है वे उच्च वर्गों से काफी पीछे हैं। यह भी स्वीकृत तथ्य है कि पूरे भारत में अनुसूचित जातियों कि सामाजिक और आर्थिक स्थिति शोचनीय है। सभी यह भी महसूस करते हैं कि अनुसूचित जातियों द्वारा अपनी कठिनाइयों और असमर्थताओं पर काबू न कर पाने का एक कारण उनमें शिक्षा का अभाव है। इन तथ्यों से यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जातियों की समस्या के हल के लिए एक निष्ठावान विशेष संगठन की आवश्यकता पूर्ण रूप से स्वीकृत होगी।
अभी तक ऐसा कोई संगठन न होने के कारण यह निर्णय किया गया कि पीपुल्स एजूकेशन सोसाइटी स्थापित की जाए। सोसाइटी का पंजीकरण सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 XII के अंतर्गत किया गया है और यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। सोसाइटी का मुख्य लक्ष्य, जैसाकि इसके गठन से प्रतीत होगा, सारे भारत में अनुसूचित जातियों में उच्च शिक्षा का संवर्धन करना है।
निकट भविष्य में सोसाइटी का बंबई में एक पूर्ण कालेज खोलने का प्रस्ताव है जिसमें कला और विज्ञान दोनों विषयों के डिग्री पाठ्यक्रमों के साथ-साथ, सभी पास और ऑनर्स पाठयक्रम होंगे। कालेज सांप्रदायिक संस्था नहीं है। यह सी प्रांतों और राज्यों के सभी संप्रदायों और धर्मों के छात्रों के लिए खुला होगा। कालेज का स्टाफ जहां तक संभव होगा सर्वदेशीय होगा। कालेज की मुख्य विशेषता यह होगी कि अनुसूचित जातियों के छात्रों की विशेष दे्खभाल, उन्हें प्रवेश, शुल्क मुक्ति, छात्रवृŸा